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MP Election 2023: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव अभियान में राम मंदिर की एंट्री से कांग्रेस चौंकी – MP Election 2023 Congress surprised by entry of Ram Temple in Madhya Pradesh Assembly election campaign

एमपी चुनाव 2023: कांग्रेस चाहती है कि बीजेपी उस जाल में फंसती दिख रही है जो पार्टी हिंदू ट्रकों के ध्रुवीकरण के लिए बेकार है।

द्वारा प्रशांत पांडे

प्रकाशित तिथि: सोम, 30 अक्टूबर 2023 09:26 पूर्वाह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: सोम, 30 अक्टूबर 2023 09:40 पूर्वाह्न (IST)

MP चुनाव 2023: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव अभियान में राम मंदिर के प्रवेश से कांग्रेस चौंकी

मध्य प्रदेश चुनाव में राम मंदिर।

पर प्रकाश डाला गया

  1. कांग्रेस का थिंकटैंक का मानना ​​था कि भाजपा अपना पहचान पत्र यानी राम मंदिर को बचाकर रखेगी।
  2. भव्य राम मंदिर में रामलला की मूर्ति प्रतिष्ठा अगले वर्ष 22 जनवरी को प्रस्तावित है।
  3. प्रदेश में कांग्रेस जगह-जगह राम और राम मंदिर की होर्डिंग हटाने की मांग कर रही है।

एमपी चुनाव 2023: सद्गुरु शरण। मध्य प्रदेश में कई दिनों से आक्रामक रुख अपनाने की कोशिश कर रही कांग्रेस अब शायद कुछ पलेहरकर अपनी रणनीति पर एकजुट होना चाहती है। शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के गृह-गढ़ हिंदुवे से पार्टी का प्रचार अभियान शुरू हुआ, केंद्रीय अमित शाह ने किशोरावस्था में ही कांग्रेस के कान पकड़ लिए थे। पार्टी को ऐसी उम्मीद नहीं थी।

कांग्रेस की थिंकटैंक का मानना ​​था कि बीजेपी अपना कार्ड यानी राम मंदिर की खोज, मिशन 2024 के लिए बचाकर रखेगी, जबकि अमित शाह ने अपनी विचारधारा में स्पष्ट कर दिया कि मध्य प्रदेश चुनाव विकास के अलावा राम मंदिर और गुटनिरपेक्ष भाजपा का मुख्य मुद्दा होगा।

उल्लेखनीय है कि अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर में रामलला की मूर्ति प्रतिष्ठा अगले वर्ष 22 जनवरी को प्रस्तावित है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद वहां मौजूद हैं। इससे पहले पांच अगस्त 2020 को भी मोदी ने राम मंदिर का भूमि पूजन किया था। हिंद में अमित शाह के भाषण पर गौर करें तो भाजपा की रणनीति साफ दिखती है।

पार्टी ने दशकों तक राम मंदिर निर्माण की राह में बाधाएं खड़ी करने के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया क्योंकि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को मंदिर निर्माण और मूर्ति प्रतिष्ठा का पूरा श्रेय दिया। राहुल गांधी को रामलला के दर्शन करने के लिए अयोध्या आने का निमंत्रण देने वाले शाह पार्टी के आक्रामक समर्थक हैं।

हिंद में शाह के मुख्‍यालय होते थे और अन्य नेताओं ने भी इसे भुनाया था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को मध्य प्रदेश मौजूदा पीएम मोदी से सवाल किया गया कि उन्हें भगवान राम और राम मंदिर से क्या परेशानी है? राम इस देश के रोम-रोम में बसे हैं। उनके बिना इस देश में काम नहीं हो सकता।

भाजपा के इस रुख से हतप्रभ कांग्रेस प्रदेश में जगह-जगह राम और राम मंदिर के होर्डिंग हटाने की मांग कर रही है। दमोह की सभा में प्रियंका चोपड़ा ने कहा कि कुछ नेता धर्म की बात करते हैं, काम की नहीं, लेकिन बीजेपी को कांग्रेस की ओर से यह अपनी रणनीति के अनुरूप प्रतीत हो रहा है। भाजपा के नीतिकारों का मानना ​​है कि कांग्रेस राम मंदिर और राम के मुद्दे पर जोर-शोर से लड़ेगी, भाजपा को ही फायदा मिलेगा।

शिवराज सिंह ने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि मुद्रा में भगवान राम की मूर्ति की कोई भी कीमत नहीं बताई जाएगी। दरअसल, कांग्रेस न चाहती थी कि बीजेपी उस जाल में फंसती दिख रही है जो पार्टी हिंदू धर्म के ध्रुवीकरण के लिए आवारा बनी हुई है।

राम मंदिर के मुद्दे पर तल्ख प्रतिक्रिया व्यक्त करने से पहले कांग्रेस इजराइल-हमास विवाद में भी देश के विशिष्ट स्टैंड से अलग-अलग अनुयायियों को अपने समर्थकों को आकर्षित करना है। इसी मुद्दे पर गत दिवस संयुक्त राष्ट्र में संघर्ष विराम के प्रस्ताव पर भारत के अस्थिर प्रवास पर भी प्रियंका गांधी ने कहा था कि वह इस पर रोक लगा रहे हैं। भाजपा इस विवाद में कांग्रेस के रुख को लेकर अपनी मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने की योजना के रूप में प्रचारित कर रही है।

भाजपा नेतृत्व का मानना ​​है कि हिंदुत्व और राम मंदिर के मुद्दे को कांग्रेस की जाति-आधारित वोटबैंक रणनीति को खत्म कर दिया जाएगा। कांग्रेस मुस्लिम वोटबैंक के प्रति धीरे-धीरे जुड़ेगी, भाजपा के पक्ष में मुस्लिम गैर बैंक का ध्रुवीकरण शून्य ही गति होगी।

इस रणनीति को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मध्य प्रदेश के चुनाव अभियान में प्रमुख प्रचारक के रूप में शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। उधर, कांग्रेस लिमिटेड के पास यह है कि उसके पास बीजेपी के हिंदुत्व कार्ड के कट के विकल्प हैं।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठन पर कांग्रेस का रुख जाने-अनजाने पार्टी के मुस्लिम-परस्त होने की धारणा बनी हुई है, हालांकि कमल नाथ सहात हिंदुत्व की लाइन पर कायम हैं। वह बार-बार इस नजर से राहुल-प्रियंका की भी छवि का प्रयास करते रहते हैं, लेकिन उनकी कोशिश पर दूसरे पूर्व मुख्यमंत्री अलाश सिंह की तलाश-तलाशकर पानी फिरते रहते हैं।

असली, मुस्लिम वोटबैंक के मोर्चे पर यूक्रेनी सिंह कांग्रेस के आदर्श ही प्रभावशाली चेहरे हैं, जैसे किसी समुद्र में मध्य प्रदेश के ही कद्दावर नेता अर्जुन सिंह हुए थे। ऑफ़लाइन सिंह स्पष्टबयानी के लिए भी जाएं।

उनके कथन बार-बार पार्टी को धर्मसंकट में डाले रहते हैं। कोई आश्चर्य नहीं कि चुनाव अभियान थोड़ा आगे बढ़ता ही गया, भाजपा गठबंधन सिंह के ऐसे कई नए-पुराने दावे झील को याद दिलाए गए।

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