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Gupt Navratri 2024: नवरात्र का पांचवां दिन मां छिन्नमस्ता को समर्पित, जानिए कैसे हुई देवी की उत्पत्ति

शिवपुराण और मार्कण्डेय पुराण में वर्णन किया गया है कि देवी छिन्नमस्ता ने राक्षसों के संहार कर देवताओं को मुक्त किया था। नवरात्रि के दौरान देवी मां की पूजा करने से संकटों से मुक्ति मिलती है और किसी भी चीज का भय नहीं रहता है। देवी छिन्नमस्ता 10 महाविद्याओं में से एक मणि जाती हैं।

द्वारा एकता शर्मा

प्रकाशित तिथि: बुधवार, 10 जुलाई 2024 10:14:52 पूर्वाह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: बुधवार, 10 जुलाई 2024 10:26:48 पूर्वाह्न (IST)

गुप्त नवरात्रि 2024: नवरात्रि के पांचवे दिन मां छिन्नमस्ता को समर्पित, जानिए कैसे हुई देवी की उत्पत्ति
माँ छिन्नमस्ता (प्रतीकात्मक चित्र)

पर प्रकाश डाला गया

  1. छिन्नमस्ता माता को मां पार्वती का स्वरूप माना जाता है।
  2. माता के हाथ में स्वयं का ही कटा हुआ सिर रखा होता है।
  3. छिन्नमस्ता माता को अत्यंत उग्र माना जाता है।

धर्म डेस्क, इंदौर। गुप्त नवरात्रि 2024: गुप्त नवरात्रि के पांचवें दिन मां छिन्नमस्ता की पूजा की जाती है। 10 महाविद्याओं में मां छिन्नमस्ता का 5वां स्थान है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां छिन्नमस्ता व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं दूर कर उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इन पूजा करने से व्यक्ति को अकाल मृत्यु का डर नहीं सताता है।

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देवी छिन्नमस्ता की उत्पत्ति

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार मां भगवती अपनी सखियों के साथ मंदाकिनी नदी में स्नान-ध्यान कर रही थीं। उसी समय माता की सहेलियों को बहुत भूख लगने लगी। भूख की पीड़ा के कारण दोनों साथियों का चेहरा पीला पड़ गया। चूंकि, उन दोनों को खाने के लिए कुछ नहीं मिला, इसलिए उन्होंने माता से भोजन उपलब्ध कराने के लिए कहा। अपनी सखियों की विनती सुनकर माता ने कहा- हे सखियों! कृपया थोड़ा धैर्य रखें। स्नान के बाद ही खाना बनेगा।

हालांकि, दोनों सखियों ने भोजन की तत्काल व्यवस्था करने का अनुरोध किया। मां भगवती ने तुरंत अपनी तलवार निकाल ली और अपना सिर काट लिया। तुरन्त ही मां भगवती का सिर उनके बाएं हाथ में कटकर आ गिरा। इससे रक्त की तीन धाराएं निकल पड़ीं। सखियों ने दो इंडेक्स से भोजन करना शुरू कर दिया। माता स्वयं तीसरी धारा से रक्त पान करने वाली। उसी समय मां छिन्नमस्तिका का प्रादुर्भाव हुआ।

मां छिन्नमस्ता का महत्व

  • देवी छिन्नमस्ता भगवती त्रिपुरसुन्दरी को उग्र रूप माना जाता है।
  • तंत्र-मंत्र सीखने वाले साधकों के लिए गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व होता है।
  • माँ को चिन्तापूर्णी भी कहा जाता है। इसका अर्थ यह है कि मां चिंताएं दूर कर देती हैं।
  • जो भक्त सच्ची आस्था और भक्ति के साथ माँ के दरबार में आते हैं, उनकी मनोकामनाएं सर्वथा पूर्ण होती हैं।
  • शिव पुराण में उल्लेख है कि देवी छिन्नमस्ता ने राक्षसों का वध करके देवताओं को उनसे मुक्त कराया था।

डिस्क्लेमर

इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीय बात नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक बैठकों/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक भेजी गई है। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’


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