BusinessFoodsGamesTravelएंटरटेनमेंटदुनियापॉलिटिक्सवाराणसी तक

Article 370 पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पीएम मोदी ने लिखा संपादकीय, पढ़िए बड़ी बातें – PM Modi wrote editorial after Supreme Court decision on Article 370 read big things

पीएम मोदी ने लिखा, आज जम्मू, कश्मीर और लोगों के सपने समय के मोहताज नहीं, बल्कि भविष्य की बातें हैं।

द्वारा अरविन्द दुबे

प्रकाशित तिथि: मंगलवार, 12 दिसंबर 2023 08:33 पूर्वाह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: मंगलवार, 12 दिसंबर 2023 08:33 पूर्वाह्न (IST)

आर्टिकल 370 पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पीएम मोदी ने लिखी ये बड़ी बातें, पढ़ें बड़ी बातें

पर प्रकाश डाला गया

  1. सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 पर केंद्र के फैसले को सही ठहराया
  2. मोदी ने दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन नईदुनिया में लिखा
  3. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत किया है

नरेन्द्र मोदी। सर्वोच्च न्यायालय ने एनोटेशन-370 और 35-ए को ऐतिहासिक निर्णय पर निर्णय दिया। उन्होंने अपने निर्णय में भारत की संप्रभुता और अखंडता को बरकरार रखा, जिसे प्रत्येक भारतीय सदैव संजोया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट का यह कहना बिल्कुल सही है कि 5 अगस्त 2019 को जो फैसला आया, उसमें संवैधानिक एकीकरण को बढ़ावा देने का उद्देश्य था, न कि किसी फैसले के उद्देश्य से। उनका यह भी मानना ​​था कि एलोकैट-370 का स्वरूप निर्धारित नहीं था। जम्मू, कश्मीर और खूबसूरत की और शांत वादियाँ, बर्फ से बने चट्टानी पहाड़, जंगलों से लेकर हर भारतीय को मन्त्रमुग्ध करते रहे हैं, लेकिन कई दशकों से जम्मू-कश्मीर के कई स्थानों पर ऐसी हिंसा और दृष्टिकोण देखे गए, जिनकी कल्पना तक नहीं की जा सकी हो सकता है।

आज़ादी के समय राजनीतिक नेतृत्व के पास राष्ट्रीय एकता के लिए एक नई शुरुआत का विकल्प था, लेकिन इसके बजाय विचारधारा को जारी रखने का निर्णय लिया गया। इससे पहले राष्ट्रीय हितों की अनदेखी हुई। मेरी यह सर्वमान्य अवधारणा यह कह रही है कि जम्मू-कश्मीर एक राजनीतिक अवशेष नहीं है, बल्कि समाज के अवशेषों को पूरा करने में था। डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी नेहरू में बने रह सकते थे, फिर भी उन्होंने रसायन शास्त्र के मुद्दे पर छोड़ दिया और आगे की कठिन राहें बनाईं। कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी, उनके बलिदान पर करोड़ों भारतीय कश्मीर मुद्दे से इसकी साख के रूप में जुड़ा हुआ है। इसी तरह अटलजी ने ‘इंसानियत’, ‘जम्हूरियत’ और ‘कश्मीरियत’ का जो प्रभावशाली संदेश दिया, वह हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहा।

जम्मू-कश्मीर में जो कुछ हुआ, वह राष्ट्र और वहां के लोगों के साथ एक बड़ा विश्वास था। अनुच्छेद-370 एवं 35-ए जम्मू, कश्मीर और दहशत के सामने बड़े अजीब तरह के थे। इन सूक्ष्मताओं के कारण एक ही राष्ट्र के लोगों के बीच दूरियां पैदा हो गईं। मैं इसे लेकर बिल्कुल स्पष्ट था कि जम्मू-कश्मीर के लोग अपने बच्चों के लिए एक ऐसा जीवन चाहते हैं, जो हिंसा और अनिश्चितता से मुक्त हो। जम्मू-कश्मीर के लोगों की सेवा के लिए हमने तीन बातें बताईं- नागरिकों की प्रगति को बढ़ावा देना, सरकार के कार्यों के माध्यम से मित्रता-विश्वास का निर्माण करना और सतत विकास को प्राथमिकता देना।

2014 में के विनाशकारी बाढ़ आई में, जिससे घाटी में बहुत नुकसान हुआ। सितंबर 2014 में मैंने स्थिति का आकलन करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये की विशेष सहायता की घोषणा की। इससे यह संदेश गया कि हमारी सरकार वहां के लोगों से मदद के लिए आग्रह करती है। मुझे जम्मू-कश्मीर के लोगों से मिलने का अवसर मिला। इस दौरान एक बात समान रूप से उभरे कि लोग न केवल विकास चाहते हैं, बल्कि दशकों से व्याप्त गरीबी से भी मुक्ति चाहते हैं। उस साल मैंने जम्मू-कश्मीर में जान गंवाने वाले लोगों की याद में दीपावली नहीं मनाई और दीपावली के दिन वहां रहने का फैसला किया। मई 2014 से मार्च 2019 के दौरान जम्मू-कश्मीर की विकास यात्रा और पर्यटन स्थल प्रदान करने के लिए वहां के केंद्र के 150 से अधिक दौरे हुए। यह एक कीर्तिमान है। 2015 का विशेष कार्यक्रम जम्मू-कश्मीर में विकासात्मक एसोसिएटेड को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

खेलशक्ति में युवाओं के सपनों को साकार करने की क्षमता को पहचानते हुए जम्मू और कश्मीर में विभिन्न खेल स्थानों का आधुनिकीकरण किया गया और प्रशिक्षक उपलब्ध कराए गए। स्थानीय स्तर पर फुटबॉल क्लबों की स्थापना को एक असाधारण पहल रही। इसके परिणाम शानदार निष्कर्ष। मुझे बैबीबॉल खिलाड़ी अफ़शां आशिक का नाम याद आ रहा है। दिसंबर 2014 में वह आतंकवादी हमले करने वाले एक समूह का हिस्सा थे, लेकिन शेख फुटबॉल की ओर से सही प्रोत्साहन बैठक में शामिल हो गए। ट्रेनिंग के बाद उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया। ‘इंडियाडायग्स’ कार्यक्रम के दौरान उनसे हुई बातचीत में मैंने कहा था कि अब ‘बेंड इट लाइक बेकहम’ से आगे बढ़ने का समय है, क्योंकि अब यह ‘एज इट लाइक बेकहम’ है। अब अन्य युवाओं ने किक बॉक्सिंग, कराटे और अन्य खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाना शुरू कर दिया है।

एक समय सामने या तो सत्य में बने रहना या अपने सिद्धांतों पर अटल बने रहना का विकल्प था। हमने अपने आदर्शों को प्राथमिकता दी। पंचायत की सफलता ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को लोकतांत्रिक प्रकृति प्रदान की। कश्मीर के प्रधानों के साथ हुई बातचीत के अलावा अन्य आध्यात्मों में मैंने एक प्रयास किया कि किसी भी राज्य में विद्वानों को प्रकाश नहीं दिया जाना चाहिए। मुझे खुशी हुई कि इसे बनाए रखा गया। जब स्कूल जाते हैं तो सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों का होता है।

5 अगस्त, 2019 का ऐतिहासिक दिन हर भारतीय के दिल और दिमाग में बसा हुआ है। टैब से जम्मू, कश्मीर और नींद में बहुत कुछ बदलाव आए हैं। पिछले चार वर्षों में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र में फिर से भरोसेमंद जगने के रूप में देखा जाना चाहिए। महिलाएँ, आधारभूत जातियाँ, जनजातियाँ और समाज के विचारधाराओं को उनका हक़ नहीं मिल रहा था। वहीं, मृतकों के निशानों को भी खत्म कर दिया गया था, लेकिन 5 अगस्त 2019 ने सब कुछ बदल दिया।

सभी केंद्रीय कानून अब बिना किसी पूर्वनिर्धारित के लागू होते हैं। त्रिस्तरीय पुरातात्विक राज प्रणाली लागू हो गई है, बीडीसी का चुनाव हो गया है और कार्मिक सामुदायिकता, जिसमें लगभग शामिल हो गया है, उन्हें भी विकास का लाभ मिलना शुरू हो गया है। केंद्र सरकार के प्रमुखों की अधिसूचना में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया है। इससे वित्तीय समावेशन में प्रगति हुई है। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भी दुकानदारों का विकास किया गया है। सभी ने खुले में शौच से मुक्त-ओ का अनुमोदन प्राप्त कर लिया है। सरकारी रिक्तियाँ, जो कभी-कभी पूरक और पूर्वाभास का शिकार होती थीं, बंधक और सही प्रक्रिया के अंतर्गत आती हैं। छात्रावास और पर्यटन में बढ़ावा सभी देख सकते हैं। अब रिकार्ड ग्रोथ, रिकार्ड डेवलपमेंट, ट्रोसोल के रिकार्ड आगमन के बारे में लोगों को सुखद आश्चर्य होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर को अपने फैसले में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत किया है। आज जम, कश्मीर और दिमाग के लोगों के सपने समय के मोहताज नहीं, बल्कि भविष्य के सपने हैं।

  • लेखक के बारे में

    ईसाईयों की शुरुआत 2006 में मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से हिंदी संध्या दैनिक ‘प्रभात किरण’ से हुई। इसके बाद न्यूज़ टुडे और हिंदी डेली मैगज़ीन (राजस्थान पत्रिका समूह) में धार्मिक दार्शनिक। 2014 में naidunia.com से डिजिटल की


Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button