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सिद्ध तंत्र पीठ भैरव बाबा मंदिर मे नौ दिनों तक किया गया अनुष्ठान – ritual performed for nine days

नवरात्र में सिद्ध तंत्र पृष्णि भैरव बाबा मंदिर परिसर में शतचंडी पाठ एवं भैरव के विशेष मंत्रों का पाठ और अन्य विभिन्न अनुष्ठान किये गये। मंगलवार को शाम को पूर्णाहुति दी गई।

द्वारा योगेश्वर शर्मा

प्रकाशित तिथि: गुरु, 18 अप्रैल 2024 12:50 पूर्वाह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: गुरु, 18 अप्रैल 2024 12:50 पूर्वाह्न (IST)

सिद्ध तंत्र तीर्थयात्रा

पर प्रकाश डाला गया

  1. भैरव बाबा मंदिर में भव्य मंदिर
  2. नौ दिन तक चला विशेष अनुष्ठान
  3. घर के साथ पाठ किया गया

नईदुनिया न्यूज, रतनपुर : नवरात्र में सिद्ध तंत्र पृष्णि भैरव बाबा मंदिर परिसर में शतचंडी पाठ एवं भैरव के विशेष मंत्रों का पाठ और अन्य विभिन्न अनुष्ठान किये गये। मंगलवार को शाम को पूर्णाहुति दी गई।

वहीं रविवार को कन्या भोज, ब्राह्मण भोजन महा भंडारे के साथ राजकुमारी हुआ। आयोजन को सफल बनाने में मुख्य रूप से पं. दलीप जैन, पं. महेश्वर पांडे, पं. कान्हा तिवारी, पं. रबदीन पति-पत्नी दीपक मूर्तियाँ सहित मंदिर प्रबंधन के सदस्य शामिल रहे। वहीं भैरव मंदिर के महंत एवं मुख्य पुजारी पं. जागेश्वर मूर्ति ने बताया कि कालभैरव अष्टमी वाले दिन भगवान कालभैरवनाथ की उत्पत्ति हुई थी। शिव से उत्पत्ति होने के कारण इसका जन्म माता के गर्भ से नहीं होता और जन्मजात अजन्मा माना जाता है। फाकाशी के कोतवाल के नाम से भी जाना जाता है और ये अपने भक्त की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।

भैरवनाथ के दर्शन में अधूरी रहती है देवी मां की पूजा: देवी के 52 शक्तिपीठ की रक्षा भी कालभैरव अपने 52 अलग-अलग सिद्धांत बताते हैं। भगवान काल भैरवनाथ के दर्शन और पूजन की महत्ता इसी बात से समझी जा सकती है कि न तो भगवान शिव की पूजा की जाती है और न ही देवी के किसी भी शक्तिपीठ के दर्शन के बिना ही भगवान शिव की पूजा की जाती है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग हो, श्री काशी विश्वनाथ हो या देवी कामाख्या ऐसे हों रतनपुर की मां महामाया देवी के दिव्य दर्शन, बिना भैरवनाथ के दर्शन के शिव-शक्ति के दर्शन किए गए हैं इसलिए देवी मां मनवांछित फल प्राप्ति के लिए भैरव के दर्शन और दर्शन जरूर माना गया है.


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