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सामाजिक समरसता व नारी सशक्तीकरण का अदभुत संदेश, भावी राष्ट्रपति आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू – Wonderful message of social harmony and women empowerment, future president tribal woman – Draupadi Murmu

संसद और विधानसभाओं की अंकगणित के अनुसार राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू की प्रभावशाली जीत अभिनय भर रह गई है।

द्वारा नवोदित शक्तावत

प्रकाशित तिथि: मंगलवार, 28 जून 2022 04:46 अपराह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: मंगलवार, 28 जून 2022 04:50 अपराह्न (IST)

सामाजिक समरसता एवं नारी जातिवाद का अद्भुत संदेश, भावी राष्ट्रपति जनाब महिला द्रौपदी मुर्मू

मृत्युंजय लेखक

केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राजग गठबंधन की सरकार ने झारखंड के पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का लाभ दिया, सामाजिक समरसता और नारी शक्ति का अद्भुत संदेश दिया है, जिससे युवा समाज और महिलाओं के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है। संसद और विधानसभाओं की अंकगणित के अनुसार राष्ट्रपति पद की दावेदार द्रौपदी मुर्मू की प्रमुख जीत अभिनय भर रह गई है क्योंकि उन्हें ओडिशा की बीजू जनता, आंध्र प्रदेश की वरिष्ठ कांग्रेस और बहन समाजवादी पार्टी का समर्थन भी मिल चुका है। द्रौपदी मुर्मू छह साल से झारखंड के राज्यपाल रह चुकी हैं, जिसमें झारखंड के झारखंड मुक्ति मोर्चा के सभी लोग शामिल हैं, जिसमें वर्तमान और पूर्व पिछड़े वर्ग के समर्थन में भी शामिल हैं।

भाजपा ने जनाब समाज की (अनुसूचित जनजाति)की महिला को अपने राष्ट्रपति पद के लिए एक तीर से कई शत्रुताएं साध ली हैं। राजनीतिक विश्लेशकों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में भाजपा को इसका राजनीतिक लाभ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, गुजरात और ओडिशा जैसे आदिवासियों को मिलेगा। झारखंड में 41 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 34 प्रतिशत, त्रिपुरा में 32 प्रतिशत, झारखंड में 26.2 प्रतिशत और गुजरात में 15 प्रतिशत आदिवासी हैं। जनाब समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग अभी भी विकास में बहुत पिछड़ा हुआ है। ऐसे में समय पर राष्ट्रपति पद पर जनजातीय समुदाय की एक जुझारू महिला के होने का दर्जा महत्वपूर्ण नहीं होगा बल्कि यह जनजातीय समाज के सर्वांगीण और वास्तविक विकास का भी स्वर्णिम अवसर बनेगा। इस फैसले के साथ ही पार्टी अपनी शहरी पार्टी होने की छवि से बहुत आगे निकल गई है।

यह भारत जैसे महान लोकतांत्रिक देश और भाजपा जैसे सर्व लोकतांत्रिक राजनीतिक दल में ही संभव है कि बेहद गरीबी और जमीन से एक युवा महिला राष्ट्रपति पद को सुशोभित करने जा रही हैं। 25 साल के बेदाग राजनीतिक जीवन जीने वाली भारतीय संस्कारों से ओतप्रोत राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू उम्मीदवार की घोषणा के साथ ही ओडिशा में रायरंगपुर के जगन्नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की जाती है। 18 मई 2015 को झारखंड के राज्यपाल बनने से पहले वह ओडिशा में दो बार विधायक और एक बार जिओन के रूप में काम कर चुके हैं। अपने पूरे कार्यकाल में वह कभी-कभी बस्ती में नहीं रहती थी। झारखंड के जनजातीय मामले, शिक्षा, व्यवस्था व्यवस्था, स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर वह हमेशा ध्यान केंद्रित करते हैं।

द्रौपदी मुरमुन जी का जन्म 20 जून 1958 को उड़ीसा के मयूरभंज के एक युवा परिवार में हुआ था। रामा देवी वीमेन्स शास्त्र, भगवान से बी की डिग्री लेने के बाद उन्होंने एक स्कूल के शिक्षकों के रूप में निःस्वार्थ सेवा की। ओडिशा के राज्य सचिवालय में नौकरी की। 1997 में रायरागनपुर नगर पंचायत का चुनाव में राजनीति पर्दापण हुआ। मज़दूर बनने के बाद वह मानवता की सेवा में लग गई। 2000 में रायरंगपुर के विधायकों से लेकर साल 2007 तक के सर्वश्रेष्ठ विधायकों को नीलकंठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया, तब तक उनका राजनीतिक सफर बहुत ही शानदार रहा, जिसका कोई सानी नहीं है। इस प्रकार के कलाकारों से राष्ट्रपति पद तक उनके देश की सभी युवा महिलाओं की यात्रा एक आदर्श व प्रेरणा भी है।

वह देश की ऐसी पहली महिला राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हैं, जिनका जन्म आज़ादी के बाद हुआ है। जब से उन्हें राष्ट्रपति पद का दावेदार बनाया गया है तब से उनके घर और गांव में हलचल है। लेकिन उनके अलौकिक में कोई बदलाव नहीं आया है। वह अपने आवास से थोड़ी दूरी पर स्थित शिव मंदिर में झाडू लगाकर अपने दिन की शुरुआत करती हैं। भगवान शिव में उनकी गहरी आस्था है। द्रौपदी मुर्मू जी और उनका परिवार पूर्णतः शाकाहारी हैं। द्रौपदी एक बहुत ही गरीब युवा परिवार की बेटियां हैं। जो एक बड़ी उम्र तक शौच के लिए घर के बाहर जाने को अभिशप्त थी। द्रौपदी जी के परिवार की एक ऐसी बेटी थी जो सिर्फ इसलिए पढ़ती थी ताकि परिवार के लिए रोटी कमा सके। राष्ट्रपति पद की प्रतियोगी द्रौपदी ने अपने व्यक्तिगत जीवन में बहुत दुःख झेले।

उन्होंने अपने पति और दो बेटों की असमय मौत का दर्द सहा और दूसरे बेटे की मौत के बाद वे ब्रह्मकुमारी परिवार से जुड़ गए। उस समय उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह एक दिन के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनेंगे और जीत के करीब पहुंचेंगे। 2009 में चुनाव हारे के बाद फिर से गांव में रहने वाले महल और जब वापस लौटे तो आंखों को दान करने की अपनी घोषण की और अब वह भारत के राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं। जिस गांव में वह रहती है वहां कहा जाता है कि राजनीति बहुत बुरी चीज है और महिलाओं को राजनीति से बहुत दूर रहना चाहिए, आज वही गांव की महिला राष्ट्रपति बनने जा रही हैं।

दशक तक सामुदायिक भोजन और वस्त्रों से भी दूर रह रहे समुदाय को देश के सबसे बड़े भवन तक पहुंचाकर भारत ने विश्व को एक बार फिर दिखाया है कि यहां रंग, जाति, भाषा, धर्म, नस्ल, संप्रदाय का कोई भेद नहीं है। जब देश में अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है उस समय एक जनजाति समाज की महिला का राष्ट्रपति भवन तक एक सुखद संदेश है। द्रौपदी मुर्मू जी के राष्ट्रपति भवन तक भारतीय लोकतंत्र की एक शुभ घटना है। द्रौपदी जी के नामांकन पत्र की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि, ”राष्ट्रपति पद के लिए उनकी उम्मीदवारी देश भर में और समाज के सभी वर्गों द्वारा सहराना की जा रही है।” ज़मीन के प्रति उनकी समझ और भारत के विकास को लेकर उनकी दृष्टि स्पष्ट है।

मृत्युंजय मठाधीश, लखनऊ(उप्र)

  • लेखक के बारे में

    वर्तमान में नईदुनिया डॉट कॉम में शेयरधारक हैं। पत्रकारिता में अलग-अलग नामांकन में 21 साल का दीर्घ अनुभव। वर्ष 2002 से प्रिंट और डिजिटल में कई बड़े दिन सिद्धांत


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