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सर्वोच्च संवैधानिक पदों का चुनाव और विकृत बयानबाजी की राजनीति – Election of Highest constitutional posts and Politics of distorted rhetoric

इतना तो तय है कि राष्ट्रपति के चुनाव में क्रॉस वोट से कोई भी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल नहीं बचेगा।

द्वारा नवोदित शक्तावत

प्रकाशित तिथि: बुध, 20 जुलाई 2022 06:41 अपराह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: बुध, 20 जुलाई 2022 06:43 अपराह्न (IST)

सर्वोच्च संवैधानिक का चुनाव और विरोधाभासी बयानबाजी की राजनीति

मृत्युंजय लेखक

देश में नए राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चयन की प्रक्रिया जारी है और इस कड़ी में राष्ट्रपति पद के लिए पदनाम का भुगतान किया जाना है। राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार की ओर से युवा महिला द्रौपदी मुर्मू और उम्मीदवार की ओर से यशवंत सिन्हा दावेदार हैं, जबकि राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार की ओर से जगदीप धनखड़ और उम्मीदवार की ओर से राजस्थान की पूर्व राज्यपाल मार्गरेट अल्वा उम्मीदवार हैं।

राष्ट्रपति पद के लिए अलेक्जेंडर पद के लिए भुगतान किया गया है, लेकिन इस बीच जिस तरह की राजनीति और बयानबाजी देखने को मिली है वह बेहद ही शर्मनाक और विचित्रता वाली रही है। यह भी स्पष्ट हो गया है कि वर्तमान समय में देश के सभी विरोधी दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके नेतृत्व वाली भाजपा को लगातार जीत मिल रही है, जिससे वह विरोध करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

समाचार मिल रहे हैं कि राष्ट्रपति के लिए मतदान के दौरान पूरे भारत के हर राज्य में विरोधी कॉलेजों के शेयरधारकों ने भी द्रौपदी मुर्मू जी के पक्ष में मतदान किया है। यह तो टोक्यो की गिनती के बाद ही पता चला कि किन बेंचमार्क और स्केल ने क्रॉस टुकड़ों को तोड़ दिया है, लेकिन क्रूज़ ब्लॉक की गलियों में हलचल काफी तेज़ है क्योंकि चुनाव के बाद आने वाले देश राज्यों के अंदर सभी राज्यों में एक बार फिर से नए स्टॉक ब्लॉकों की गिनती होती है। इतना तो तय है कि राष्ट्रपति के चुनाव में क्रॉस वोट से कोई भी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल नहीं बचेगा।

लेकिन हम यहां पर यह विश्लेशण कर रहे हैं कि देश के विरोधी दल मोदी और बीजेपी विरोध के नाम पर मानसिक रूप से कितने नंबर जा रहे हैं। राष्ट्रपति पद के चुनाव के दौरान प्रतियोगी यशवंत सिन्हा ने जिस तरह की बयानबाजी की, वह बहुत ही लेवल की थी और हैरान करने वाली थी। वहीं टीवी चैनलों पर जिस प्रकार के विरोधी विचारधारा के प्रचारक बोल रहे थे वह भी बहुत ही हैरान करने वाला था।

युवा सिन्हा ने अपनी डॉक्यूमेंट्री में मोदी सरकार की कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ जोरदार भड़ास निकाली और सरकार पर प्रतिबंध लगाना भूल गए। वह देशहित, सुरक्षा हित भी भूल गया। कश्मीर तो साहबा मुफ़्ती, फ़ारुख अब्दुल्ला और जेल में बंद यासीन आमिर को देशभक्त कहा। अनुछेद- 370 को वापस लाने की बात कही और असम में व्यापारी ने कहा कि वह किसी भी सूरत में इसे लागू नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि वह सेंट्रल एजेन्सियो का दुरूपयोग रुकवाएंगे।

यशवंत सिन्हा ने एक महिला उम्मीदवार का सम्मान भी नहीं किया और वह द्रौपदी मुर्मू जी का गिया गुड़िया जैसे शब्दों से अपमान करते रहे। वहीं सोशल मीडिया में दलाल और भाजपा विरोधी सेकुलर गैंग ने एक बेहद ही साहसिक अभियान चलाया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक भागवत जी के साथ संपादित फोटो और उनके नीचे की मिट्टी के स्मारकों का काला कारोबार करने वाले प्रशांत भूषण जैसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक भागवत जी के साथ संपादित फोटो और उनके नीचे की मिट्टी का कारोबार करने वाले।

द्रौपदी मुर्मू जी के खिलाफ जिस प्रकार के विचारधारा वाले भाषणों का प्रयोग किया गया, उनमें समाज की महिला और जनजातीय समाज की प्रतिमूर्ति की पोल खोली गई। देश के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि एक बेहद गरीब आदिवासी परिवार की महिला देश के सर्वोच संवैधानिक पद पर आसीन हो रही है और देश के परिवारवादी, जातिवादी आश्रमों के नेताओं को यह बात पसंद नहीं आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति पद के लिए एक गरीब मुस्लिम महिला को करीब से एक नया इतिहास बताया है। द्रौपदी मुर्मू जी की विजय की गाथा 1.3 लाख गांवों में मनाई जाएगी जिसके कारण भी इन आश्रमों के हाथ फूल रहे हैं।

राष्ट्रपति पद की दावेदार द्रौपदी मुर्मू जी को “बुराई” और “डेमी” कहकर संबोधित करने वाले लेकर कांग्रेस पार्टी ने उन्हें “कठपुतली” तक कहा। कांग्रेस ने कहा कि सुपरमार्केट दल एक समर्थक राष्ट्रपति का चुनाव करना चाह रहा है। कर्नाटक से कांग्रेस के प्रमुख विधायकों ने कहा कि भाजपा एक स्वतंत्र राष्ट्रपति बनना चाहती है और इसलिए भगवा पार्टी ने कभी लालकृष्ण मठ को देश का राष्ट्रपति नहीं बनाया।

बिहार के लाल और बिहार विधानसभा के उम्मीदवार नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि राष्ट्रपति भवन में मूर्ति की जरूरत नहीं है. राजद के ही प्रवक्ता ने बेहद शर्मनाक बयान दिया कि वह कौरवों की सभा में एक और द्रौपदी का चीरहरण नहीं कर पाए थे। निंदा के दौरान सह सबसे विरोधाभासी बयान दिया गया था जिसमें काफी निंदा की जा रही थी और समाज का एक बड़ा वर्ग राजद नेताओं के खिलाफ एससीएसटी अधिनियम के तहत दोषियों की मांग की जा रही थी।

ये ऐसे ही युवा यादव हैं जब उन्हें मोदी के सामने माइक पकड़ा गया था तब उनकी आवाज में आवाज दी गई थी और उनके वीडियो सोशाल मीडिया में खूब वायरल हुए थे और टीवी चैनलों पर भी जबरदस्त बहस और उनकी जगहंसाई हो गई थी। कांग्रेस नेता अजय कुमार ने एक बयान में कहा कि वह भारत के एक बहुत ही पवित्र दर्शन का प्रतिनिधित्व करते हैं इसलिए हमें द्रौपदी मुर्मू जी को दृढ़ विश्वास का प्रतीक नहीं बनाना चाहिए।

शर्मनाक बयानबाजी करने में बंगाल के वैष्णव कांग्रेस के नेता भी पीछे नहीं रह रहे हैं। बंगाल की सफारी पार्टी के नेता बीरबाहा हांसादा ने कहा कि द्रौपदी मुर्मू जनजाति नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हम लोग आदिवासी हैं और हम लोग अपने धर्म की जगह सारे धर्म हैं। जबकि द्रौपदी मुर्मू ने अपना धर्म स्थान हिंदू पर लिखा है। उनके होने का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

हम लोग अच्छे ही युवा हैं लेकिन सच और सच्चाई को समझते हैं। जबकि असलियत तो यह है कि यह सभी दल यशस्वी सिन्हा को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने के लिए एक ऐसे चक्रव्यूह में फंसकर रह गए हैं कि वह वहां से निकल पा नहीं रहे हैं। कांग्रेस सहित सभी दल जदयू समाज के प्रति उनकी क्या सोच है और वह एक गरीब महिला के प्रति कैसा व्यवहार करते हैं आदि से बेनकाब हो गए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक व्यापक अभियान चला रही है। द्रौपदी जी की विजय से जनाब समाज को भी गौरव महसूस हो रहा है लेकिन यह सब कुछ सनातन हिंदू समाज और मजबूत हिंदू समाज विरोधी सेकुलर गैंग को रास नहीं आ रहा है। भवन के द्वार पर पहली बार एक ऐसी महिला के लिए ताला खुल रहा है जो राष्ट्रपति भवन के दरवाजे पर है। द्रौपदी मुर्मू जी का विरोध वो लोग कर रहे हैं जो लोग हमेशा महिला नटखट की मांग करते हैं यानी ये वही लोग हैं जो महिला नग्न के नाम पर सिर्फ वोटबैक की मांग करते हैं। देश के विरोधी दल न ही महिलाओं का सम्मान करते हैं न ही उनके समाज और जाति का।

इसी प्रकार जब चरित्र ने चरित्र के पद पर जगदीप धनखड़ को उम्मीदवार बनाया तब चरित्र ने चरित्र के रूप में अपना विरोध भी आरंभ कर दिया। कांग्रेस नेता राकेश राकेश ने सोशल मीडिया पर एक फोटो ट्वीट किया जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जगदीप धनखड़ जी की फोटो के नीचे लिखा कि किस पद का उम्मीदवार कौन है? आज का नामांकित व्यक्ति की पराकाष्ठा पर उतर आया है।

  • लेखक के बारे में

    वर्तमान में नईदुनिया डॉट कॉम में शेयरधारक हैं। पत्रकारिता में अलग-अलग नामांकन में 21 साल का दीर्घ अनुभव। वर्ष 2002 से प्रिंट और डिजिटल में कई बड़े दिन सिद्धांत


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