BusinessFoodsGamesTravelएंटरटेनमेंटदुनियापॉलिटिक्सवाराणसी तक

राजस्थान में मॉब लिंचिंग: दिनो दिन बढ़ती अराजकता से देश में अशांति और हिंदू समुदाय खतरे में – Mob lynching in Rajasthan Unrest in Country and Hindu community in danger due to increasing chaos day by day

जरा याद कीजिए ये वही मीडिया है जो तबरेज रिसर्च केस में रात-दिन इसे संसद तक लेकर आता है।

द्वारा नवोदित शक्तावत

प्रकाशित तिथि: शुक्र, 19 अगस्त 2022 07:26 अपराह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: शुक्र, 19 अगस्त 2022 07:32 अपराह्न (IST)

राजस्थान में मॉब लिंचिंग: डायनो दिन अल्पाहार से देश में ज्वालामुखी और हिंदू समुदाय खतरे में

प्रेरणा कुमारी –

राजस्थान में मॉब लिंचिंग मामले में पहाड़ी जिले के गोविंदगढ़ पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रामबास गांव में एक विशेष समुदाय के 20-25 लोगों के समूह ने एक हिंदू चिरंजलीलाल साकी की इतनी हत्या कर दी। चिरंजीलाल सब्जी बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। कुल के अनुसार, मृतक चिरंजीलाल रविवार सुबह करीब 5:00 बजे घर के पास के खेत में शौच गया था। इसी दौरान अलवर के सदर थाना क्षेत्र से चोर एक हितैषी को चोरी करके भाग रहे थे। पीछे से आतिथ्य मालिक और अन्य लोग मोटरसाइकिल का पीछा कर रहे थे। राकेश ने आपके साथ विश्वासघात किया, लेकिन आपके द्वारा दिए गए विश्वासघात को देखते हुए, आप को खेत में खड़ा कर दिया गया और बंधक बना लिया गया।

इनमें से एक ही मालिक और उनके दोस्त चिरंजी को चोर समझकर खेत में गए और उन्हें खेत में ही रखा। चिल्ला-पुकार कर दंग रह गए लोग भागकर क्षेत्र में तो चिंरजीलाल वहां अधमरा पड़ा था। घटिया भी थे और चिरंजीलाल पर दुकानदारी का आरोप लगा रहे थे। बाद में, प्रशासन और पुलिस के अधिकारी सूचना बैठक के बाद फैक्ट्री पर पहुंचे और तनाव को देखते हुए पुलिस बल की स्थापना की गई। परमाणु हथियार पुलिस ने परमाणु पड़े चिरंजीलाल को अस्पताल भेजा।

जहां से डॉक्टरों ने उसे प्राथमिक उपचार दिया, गंभीर चोट लगने के कारण जयपुर रेफर कर दिया इलाज के दौरान चिरंजी ने दम तोड़ दिया। देर रात मृतक का शव लेकर दक्षिणी गांव पहुंचा। चिरंजी की मृत्यु के बाद आवासीय वजीरिया की इमारतें नष्ट हो गईं और उन्होंने मठवासी की मांग की। जिसके बाद प्रशासन ने चिरंजीलाल को मारने वाले विक्रम खान, असद, साबू, साहुन, कासम और फिक को गिरफ्तार कर लिया।

मृतक चिंरजी लाल के बेटे योगेश ने पुलिस की गोली मारकर हत्या कर दी और कहा कि पुलिस दोषियों की कार्रवाई की जगह एफआईआर का इंतजार कर रही है। बुज़ुर्ग बेख़ौफ़ साईं रह रहे हैं। वहीं, वैल्यूएशन ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की। रिवाल्वर ने पुलिस पर चार लोगों को गिरफ्तार न करने का आरोप लगाया।

जिस स्थान पर वह मृत व्यक्ति के साथ गया था, उस स्थान पर पुलिस की नाकाबंदी वाली जगह से 200 मीटर की दूरी थी, लेकिन मृत व्यक्ति की चीख-पुकार सुनाई नहीं दे रही थी, जबकि गांव के लोग वही चीख सुन कर खेत में गए थे। पुलिस पर करीब 30 मिनट बाद 14 अगस्त को पुलिस ने अज़ाब में शामिल सहायक मालिक को बिना पूछताछ के छोड़ दिया। करीब 2 घंटे तक बायोमीटेल स्टेशन में सोया रहे।

कथित मीडिया, मानवाधिकार की बातें करने वाले नेता, लिबरल गैंग और सेकुलर संगठन आज मौन हैं या यह सामान्य सी घटना है, जिसमें सच्चाई को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। मीडिया इसे चोरी और जासूस में शामिल हो गया है, क्योंकि यह घटना कांग्रेस के सहयोगी दल राजस्थान की है, जहां लिबरल नेता शेखावत जी की सरकार है, तो वहां तो जेहादियों के खिलाफ बातें और कुछ लिखना गुनाह है और जहां सर तन से जुदा है। इस खतरे को भी मुख्यमंत्री जी का पूर्ण समर्थन प्राप्त है। वहां जब जाहे जिसे देखा जाहे वे मारा जा सकता है। क्योंकि वोट तो जापान की है लोकतांत्रिक सरकार को। चित्ररे 10-20 हिंदुओं की हत्या ही कर दी तो क्या हो गया।

बुद्धिजीवी तो उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के लिए बैठे ही हैं। केंद्र में सरकार किसी की हो बुद्धिजीवी संगठन तो व्यापार की तरफ है। इसी वजह से मोब लिंचिंग को चोरी का मामला असाधारण बुलिटिन द्वारा समाप्त कर दिया गया। जरा याद कीजिए ये वही मीडिया है जो तबरेज रिसर्च केस में रात-दिन इसे संसद तक लेकर आता है। 17 जून 2019 को तबरेज के रिसर्चर ने झारखंड के धतकीडीह गांव में मोटरसाइकिल चोरी के आरोप में उसे पकड़ लिया और उसके चार दिन बाद उसकी हत्या कर दी गई।

इस मुद्दे को भारत ही नहीं यूनाइटेड नेशन (यूएन) तक ले जाया गया और भारत की छवि को धूमिल करने की कोशिश की गई। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में इस घटना पर अफसोस जताया था। लेकिन आज इसी तरह की घटना एक गरीब हिंदू के साथ घटी तो इन अखबारों के किसी भी पेज पर एक छोटी सी घटना बन कर कोने में सिर्फ खबर बन कर घर है और टैब रेज हेड लाइन क्यों??? इस देश में हिंदुओं के साथ इस तरह का गंगाघाट क्यों????

अब कौन गया? क्या चिरंजीलाल को हिंदू होने की सजा मिल रही है या ऐसे प्रदेश में रहना है जहां जेहादियों को ‘सरतन से जुदा करने की नैतिकता’ हासिल है। खुले में घूमने की आजादी है। दोस्त लाल और चिरंजीलाल को जीने का कोई अधिकार नहीं है। राजस्थान में अशोक सरकार की तुष्टिकरण की राजनीति का ही नतीजा है कि राज्य में हिंदू पलायन को मजबूर हो गए हैं। इसी तरह की कहानियां आम आदमी के मन में राजस्थान की कानून व्यवस्था से आस्था जा रही है और हिंदुओं के मन में डर का आतंक गिरोह जा रहा है। राजस्थान में दिन-प्रतिदिन अपराध के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

इस पर भी अगर डेमोक्रेटिक सरकार ने राज्य में संवैधानिक सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए कोई योजना नहीं बनाई। राजस्थान में विधि व्यवस्था में पूरी तरह से तोड़फोड़ हो चुकी है और विशेष समुदाय गलत तरीके से लाभ उठा रहे हैं। बीजेपी ने कहा कि प्रदेश में लोकतांत्रिक सरकार बनने के बाद वर्ग विशेष के लोग मॉब लिंचिंग की घटना को अंजाम दे रहे हैं सरकार उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती.

चिरंजीलाल की हत्या के कारण गांव के लोगों ने गोविंदगढ़ और रामबास के बाजारों को बंद कर दिया है। मंगलवार की सुबह सैकड़ों लोगों ने रामबास और गोविंदगढ़ मार्ग पर जाम लगा दिया। सभी गरीबों की मांग कर रहे हैं सभी गरीबों ने गोविंदगढ़ थाने का रुख कर लिया है। जिसके बाद पुलिस ने मंगलवार रात 7 बजे चिरंजी हत्याकांड मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

भाजपा ने गोविंदगढ़ में चिरंजी लाल सानी की मॉब लिंचिंग में हुई हत्या की। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां ने कहा कि प्रदेश में जो घटनाएं हुई हैं, वह प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं और प्रदेश में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं, यह सरकार की लोकतांत्रिक व्यवस्था की आड़ में चल रही है।

पुनिया ने कहा कि बड़ा मसला तुष्टिकरण का भी यही सवाल है कि जब भी कांग्रेस की सरकार आती है तो वर्ग विशेष के लोग मॉब लिंचिंग में क्यों शामिल होते हैं। अभी भी समय है प्रदेश की सुख-शांति के लिए सरकार को अपनी जिम्मेदारी लेकर चार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

सरकार को वोट बैंक और तुष्टीकरण की राजनीति से आगे राज्य में शांति बहाली की सोच और हिंदू-मुस्लिम संप्रदाय को बढ़ावा देने के बजाय गठबंधन पर ध्यान केंद्रित करते हुए जेहादियों पर अलगाव के लिए कठोर कदम उठाना चाहिए। इसतरह जेहादियों को बढ़ावा देना देश में शांति और सुरक्षा के लिए घातक है जिसे सरकार और कथित बुद्धिजीवियों को समझाना अत्यंत आवश्यक है।

(लेखिका वर्तमान में स्वतंत्र लेख में सक्रिय हैं)

  • लेखक के बारे में

    वर्तमान में नईदुनिया डॉट कॉम में शेयरधारक हैं। पत्रकारिता में अलग-अलग नामांकन में 21 साल का दीर्घ अनुभव। वर्ष 2002 से प्रिंट और डिजिटल में कई बड़े दिन सिद्धांत


Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button