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वाराणसी तक

मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन के बाद अब डीएलडब्ल्यू का बदला नाम

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-अब बनारस रेल इंजन कारखाना हुआ
-रेल मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना
-तत्काल प्रभाव से नाम परिवर्तित करने के आदेश

वाराणसी. मंडुवाडीह स्टेशन के करीब 70 दिनों के बाद देश-विदेश में वाराणसी की एक और पहचान का नाम बदलकर उसका या नामकरण किया गया है। डीजल रेल इंजन बनाने के लिए मशहूर डीजल रेल इंजन कारखाना (डीएलडब्ल्यू) का नाम बदल कर बनारस रेल इंजन कारखाना (बीएलडब्ल्यू) कर दिया गया है। रेल मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर दी है। साथ ही रेल मंत्रालय ने आददेश दिया है कि तत्काल प्रभाव डीएलडब्ल्यू का नाम बीएलडब्ल्यू कर दिया जाए और आगे की सभी कार्रवाईयों में इसी नाम का प्रयोग करें। केंद्र सरकार ने अगस्त 2020 में मंडुवाडीह स्टेशन के नाम बदल कर इसे नई पहचान दी है। मंडुवाडीह स्टेशन अब बनारस स्टेशन के नाम से जाना जाता है।

डीएलडब्ल्यू बदल गया नाम :- वाराणसी डीजल रेल इंजन कारखाना मतलब डीएलडब्ल्यू का नाम गुरुवार को तत्काल प्रभाव से बदल दिया गया है। डीजल रेल इंजन कारखाना में डीजल इंजन का उत्पादन होता था। यह कारखाना देश के साथ विश्व में भी अपनी पहचान रखता था। पर पिछले कई वर्षों से यहां पर डीजल इंजन का उत्पादन काफी कम हो गया है। और अब उसकी जगह इलेक्ट्रिकल इंजन का उत्पादन भारी मात्रा में होने लगा है। डीएलडब्ल्यू की नई पहचान डीजल इंजन न हो कर इलेक्ट्रिकल इंजन हो गई है।

प्रथम राष्ट्रपति ने रखी थी नींव :- देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 23 अप्रैल 1956 में डीएलडब्ल्यू की नींव रखी थी। करीब पांच साल बाद अगस्त 1961 डीजल लोकोमोटिव वर्क्स प्रभाव में आया। जनवरी 1964 में प्रथम रेल इंजन राष्ट्र को समर्पित हुआ था।

तीन में नामों पर हुई चर्चा :- डीएलडब्ल्यू के नए नामकरण को लेकर लगभग सालभर से कवायद चल रही थी। तीन नामों का प्रस्ताव साल भर पहले भेजा गया था। इसमें दीनदयाल लोको वर्क्स, बनारस लोकोमोटिव और काशी लोकोमोटिव था। पर अंत में सभी की सहमति बनारस रेल इंजन कारखाना के नाम पर बनी। इस नए नाम से डीजल इंजन और इलेक्ट्रिकल इंजन का अंतर समाप्त हो जाएगा। अब पूरे विश्व में बनारस लोको का ही नाम जाएगा। कर्मचारियों ने कहा कि केंद्र सरकार की यह अच्छी पहल है।

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“खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते”।

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