BusinessFoodsGamesTravelएंटरटेनमेंटदुनियापॉलिटिक्सवाराणसी तक

भारत जापान मैत्री के शिल्पकार और दूरदृष्टि वाले राजनेता थे शिंजो आबे – The architect of India-Japan friendship and a visionary politician – Shinzo Abe

आज शिंजो ओबे भले ही हम सभी लोगों के बीच नहीं हैं, लेकिन उनके दूरदर्शी फिल्म निर्माता आगे आने वाले नेताओं को अलग-थलग कर देंगे।

द्वारा नवोदित शक्तावत

प्रकाशित तिथि: सोम, 11 जुलाई 2022 04:53 अपराह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: सोम, 11 जुलाई 2022 04:54 अपराह्न (IST)

भारत जापान मैत्री के शिल्पकार और दूरदर्शिता वाले राजनेता थे शिंजो आबे

मृत्युंजय लेखक

जापान के सबसे शक्तिशाली, प्रभावकारी, दूरदर्शी, लोकप्रिय नेता पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की 8 जुलाई को नारा शहर में एक पहलवान, तेत्सुया यामागामी नाम के एक (41 वर्ष) के एक युवा ने गोली मारकर हत्या कर दी, जिसका कारण पूरा जापान ही नहीं, पूरा विश्व था। जगत भी शोक में डूब गया। सभी हैरान और स्तब्ध हैं।

पूर्व राष्ट्रपति शिंजोआबे पूरी दुनिया में चीन के विस्तारवाद के खिलाफ एक तगड़ी विचारधारा दिखा रहे थे। शिंजोआबे जापान के ऐसे प्रधानमंत्री थे जो 8 साल तक जापान के प्रधानमंत्री रहे और उन्होंने वहां की लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्थिर स्थिरता की और जापान में काफी बदलाव करते हुए विकास को नई गति देने का काम किया। आज जापान की विश्व जगत में जो धाक जमी है उसकी वजह से एक कंपनी बनाई गई थी। जैसे ही शिंजो पर हमलों का समाचार चीनी मीडिया ने ही प्रोपेगैंडा शुरू कर दिया और सोशल मीडिया में चीनी लोग खुशी खुशी लागे।

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या काफी हैरान करने वाली है क्योंकि जापान में कभी-कभी हिंसा या इस तरह के प्रचलन नहीं होते हैं और वहां अमेरिका की तरह के हथियार भी आसानी से नहीं जा सकते हैं। ।। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे भारत- जापान मित्रता के प्रबल पक्षधर थे। शिंजोआबे एक ऐसे दूरदर्शी नेता थे, जो प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते आक्रामक डायनासोर थे, जिन्होंने समय-समय पर अमेरिका, जापान, वैज्ञानिक और भारत के साथ मिलकर सामूहिक गठबंधन बनाया था। एशिया प्रशांत क्षेत्र के भू-राजनैतिक परिदृश्य में भी उन्होंने अपनी गहरी छाप छोड़ी है जिसका प्रभाव काफी समय तक दिखायी देता है।

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री की निर्मम हत्या से भारत ने भी अपना एक परम मित्र खो दिया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पूर्व राष्ट्रपति शिंजो आबे की दोस्ती किसी से नहीं है। आज जापान भारत के विकास में पूर्ण सहयोग कर रही है तथा अनेकानेक अर्हता-परियोजनाओं में वह भारी निवेश भी कर रही है। सौर ऊर्जा से लेकर मेट्रो और पुरातत्व रेलवे स्टेशन जापान का निवेश है। आत्मनिर्भर भारत अभियान में भी जापान अहम भूमिका अदा कर रहा है। आज भारत में चीनी कंपनियों के व्यापार में आ रही गिरावट के लिए भी चीन के लिए जापान को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

शिंजोआबे जापान में राष्ट्रीय छवि के नेता यही कारण है कि उनके भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गहरी मैत्री हो गई थी। मोदी जी से मैत्री के कारण ही शिंजोआबे ने सबसे अधिक बार भारत की यात्रा की और मित्रता ओ एक जहां तक ​​बने रहे। प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी गहरी मैत्री के कारण ही 2014 में विकास मंडल पर एकीग्रत होकर भारत-जापान के बीच साध्य यात्री समझौता हुआ, जिसके तहत भारत को 88 हजार करोड़ रुपये का कुल मार्जिन 0.1 प्रतिशत ब्याज पर देना हुआ। हिंद प्रशांत क्षेत्र में भी साझेदारी हुई और 2016 में असैन्य परमाणु समन्वित हुआ यह इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि पहले जापान ने कभी भी भारत को परमाणु शक्ति के बारे में पुष्टि नहीं दी थी। 2007 में स्वर्गीय शिंजोआबे ने प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए भारत यात्रा की और संसद में भाषण देते हुए भारत-जापान मैत्री को अहम संदेश देते हुए इन देशों को “दो सागरों का मिलन” बताया। इस भाषण के अनुसार विदेश नीति के विशेषज्ञ ने भारत-जापान को और अधिक पास करने की सलाह दी। शिंजोआबे 2014 के गणतंत्र दिवस परेड में वे मुख्य अतिथि भी रहे।

शिंजोआबे भारत से विशेष साथी थे। वह एक ऐसे जापानी प्रधानमंत्री थे जिन्होंने भारत का सबसे अधिक 5 बार दौरा किया था। वह पहली बार 2006 -07 में भारत आये। उनके बाद 2012 से 20 के मध्य में उनका दूसरा पद 2014, 15 और सितंबर 2017 में भारत आया। भारत के प्रति शिंजो आबे का प्यार ही था क्योंकि भारत ने उन्हें 2021 में अपने नागरिक सम्मान पद्मविभूषण से सम्मानित किया था।

जापानी प्रधानमंत्री शिंजोआबे का काशी से भी परिचय हुआ था, लेकर नरेंद्र मोदी अपने साथ काशी लेकर गए जहां वह गंगा आरती में शामिल हुए और पूजा की थाली में हाथ डालकर आरती निकाली। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजोआबे ने काशी को क्योटो बनाने का साझा संकल्प लिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रीमद्भगवद गीता की कथा बताई। स्मरण रहे कि काशी में आज जो रुद्राक्ष कन्वेन्शन सेंटर बना हुआ है, उसके निर्माण में जापान का ही सहयोग मिल रहा है।

सितंबर 2017 में उन्होंने गुजरात आए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पीएम मोदी के साथ रोड शो किया और भारत-जापान बातचीत में हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ साबरमती आश्रम में महात्मा गांधी की यात्रा पर शिंजोआबे ने भी दी श्रद्धांजलि। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिंजो आबे के कार्यकाल में जब जापान पहुंचे तो वहां भी उनका भव्य स्वागत किया गया। जापान यात्रा के दौरान दोनों दोस्तों ने एक साथ साइंटिस्ट ट्रेन में भी यात्रा की। स्वर्गीय शिंजोआबे भारत को सुपर पावर के रूप में देखना चाहते थे और वह भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए भी पक्षधर थे। स्वतंत्र भारत की यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण प्रस्तावना में से एक के रूप में उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि नया भारत अपने विकास की गति को तेज करना चाहता है तो जापान के साथ विद्यमान रहेगा।

शिंजोआबे की राय का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि फोर्ब्स मैगजीन ने उन्हें 2018 में दुनिया का 38वां सबसे मशहूर शख्सियत माना है। राजनीति में उतरने से पहले उन्होंने फिल्मों में भी काम किया था। उनका जन्म एक राजनीतिक परिवार में हुआ था और उनके परिवार से पहले भी जापान के दो प्रधानमंत्री मिल चुके थे।

अबे जापान के पहले प्रधानमंत्री ने लोहे के टुकड़े दुनिया में साझा की और चीन के खतरे को महसूस किया। चीन के आक्रामक सहयोगियों और उत्तर कोरिया जैसे पड़ोसियों पर ध्यान केंद्रित किया गया, आबे ने फिर से जापान की सैन्य बलों को वापस लाने के प्रयास में वापसी की।

आज शिंजो ओबे भले ही हम सभी लोगों के बीच नहीं हैं, लेकिन उनके दूरदर्शी फिल्म निर्माता आगे आने वाले नेताओं को अलग-थलग कर देंगे। भारत पर विभिन्न मंचों ने भी अपनी विकास यात्रा में उनके योगदान को याद किया। इस जघन्य हत्या के दूरगामी राजनीतिक परिणाम भी होंगे जिनका प्रभाव भविष्य में दिखाई देगा।

प्रेषक – मृत्युंजय मित्र

  • लेखक के बारे में

    वर्तमान में नईदुनिया डॉट कॉम में शेयरधारक हैं। पत्रकारिता में अलग-अलग नामांकन में 21 साल का दीर्घ अनुभव। वर्ष 2002 से प्रिंट और डिजिटल में कई बड़े दिन सिद्धांत


Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button