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भारत के सशक्त लोकतंत्र की परिचायक हैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु – President Draupadi Murmu is a symbol of Indias strong democracy

नए भारत देश के किसी भी कोने में एक सामान्य गरीब व्यक्ति का भी सपना देखा जा सकता है और उन्हें पूरा किया जा सकता है।

द्वारा नवोदित शक्तावत

प्रकाशित तिथि: मंगलवार, 26 जुलाई 2022 07:57 अपराह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: मंगलवार, 26 जुलाई 2022 07:59 अपराह्न (IST)

भारत के रिपब्लिकन लोकतंत्र की परिचायक हैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

मृत्युंजय लेखक

महामहिम द्रौपदी मुर्मू जी के शपथ ग्रहण के साथ ही भारत के राष्ट्रपति पद के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ा है। भारत का पूरा गरीब और जनजातीय समाज आनंद विभोर है और 1.3 लाख करोड़ रुपये के दायरे में उत्सव का माहौल है। उल्लास का यह माहौल उसी दिन से है जब द्रौपदी मुर्मू जी को राष्ट्रपति पद के लिए पद के रूप में चुना गया था। यह उल्लास वसंगरे हो भी क्यों न क्योंकि जन मानस में यह विश्वास पाठा है कि नए भारत के किसी भी कोने में एक सामान्य गरीब व्यक्ति भी सपने में देख सकता है और उन्हें पूरा कर सकता है। आज संपूर्ण भारत आनंदित और नवीनीकृत हो रहा है क्योंकि उनका अपने लोकतंत्र पर विश्वास दृढ़ हो गया है।

भारत की नवनियुक्त राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी ने जिस प्रकार से अपना आशीर्वाद दिया है, उसमें भविष्य की राजनीति के संकेत दिए हैं और यह भी संदेश दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार आने वाले समय में देश के गरीबों के कल्याण के लिए आएगी। बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। यह एक संयोग ही है कि जब देश के पूर्व राष्ट्रपति मितानिनों की विदाई हो रही थी और द्रौपदी जी के राष्ट्रपति पद के लिए चयन हो रहा था, उस समय नई दिल्ली में भाजपा, छत्तीसगढ़ राज्यों के भाषण और उपमुख्यमंत्रियों का सम्मेलन भी हो रहा था, जिसमें गरीब भी शामिल थे। कल्याण पात्रता की समीक्षा भी की गई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से एक बड़ा संदेश भी दिया गया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी ने अपनी प्रथम प्रार्थना में कहा था कि हमारे स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों ने आजाद हिंदुस्तान के हम नागरिकों से, जो अपने स्थान की नियुक्ति के लिए अमृतकाल में काम करना चाहते हैं, तेज गति से काम करना है। इन 25 वर्षों में अमृतकाल की सिद्धि का मार्ग दो पितृओं पर आगे बढ़ेगा हर प्रयास और हर कर्तव्य। राष्ट्रपति ने कहा कि मैंने अपनी जीवन यात्रा ओडिशा के एक छोटे से जवान गांव से शुरू की थी। मैं बैकग्राउंड जिसमें से आती हूं वहां मेरे लिए एक सपना जैसा ही था। लेकिन कई बच्चों के बावजूद मेरा संकल्प दृढ़ रहा और मैं अंबेडकर जाने वाली गांव की पहली बेटी बनी। मैं जनजातीय समाज से हूं और वार्ड काउंसिलर से लेकर भारत के राष्ट्रपति बनने तक का अवसर मिला हूं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मर्मू जी ने सबसे बड़ी बात कही थी कि भारत में गरीब सपने देख सकते हैं, मेरा चयन होना इसका प्रमाण है। नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने अपनी प्रार्थना में कहा कि, “यह मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, संयुक्त भारत के हर गरीब की उपलब्धि है।” स्वतंत्रता संग्राम में जुबां के योगदान को समाप्त कर दिया गया था। सामाजिक एवं देश प्रेम के लिए “धरती आबा” बिरसा मुंडा जी के बलिदान से हमें प्रेरणा मिली थी। उन्होंने कहा कि मेरा जन्म तो उस जन परंपरा में हुआ है जिसने हजारों लोगों से प्रकृति के साथ मिलकर जीवन को आगे बढ़ाया है। मैंने अपने जीवन में जंगल और संस्थाओं का महत्व महसूस किया है।

राष्ट्रपति ने अपनी प्रार्थना में कोरोना वैक्सीन पर भारत की प्रतिज्ञा की चर्चा की और देश के युवाओं से कहा कि आप केवल अपने भविष्य का निर्माण नहीं कर रहे हैं बल्कि भविष्य के भारत की नींव रख रहे हैं। मेरा आपका सदैव सहयोग बना रहेगा। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई, रानी वेलु नाचियार, रानी गाइदिन्ल्यू और रानी चेनम्मा जैसे कई वीरांगनाओं की राष्ट्ररक्षा और राष्ट्रनिर्माण में भूमिका की चर्चा की।

उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि हमारी सभी बहनें और बेटियां अधिक से अधिक मजबूत हों और वे देश के हर क्षेत्र में अपना योगदान बढ़ाएं। उन्होंने डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत का भी अपने सम्बोधन में उल्लेख किया है जिससे आने वाले दिनों में देश की गरीबों से गरीब जनता के विकास के लिए केंद्र व राज्य संबोधन की ओर से डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने के लिए कई बड़े सुझाव दिए गए हैं। स्टेपये उठाओ।

द्रौपदी जी का जीवन बहुत ही सादा और उच्च विचारधारा वाला और अनुशासित रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी की सनातन धर्म में गहरी आस्था है, वे शिव के अनन्य उपासक हैं। विविधता में शुद्ध शाकाहारी हैं और भोजन में प्याज और लहसुन का प्रयोग भी नहीं होता है। उनका आधुनिक जीवन दर्शनों से पूर्णतः मुक्त है। वह स्मार्ट फोन का इस्तेमाल बहुत कम करती है और टीवी भी बहुत कम लेती है। राष्ट्रपति जी की प्रसिद्ध शिक्षा गाँव में हुई और स्नातक की पढ़ाई बफ़र्स में हुई।

अपने पति और दो बेटों के ठीक होने के बाद वह अपने मानसिक संबल के लिए ब्रह्मकुमारीज संस्था से जुड़ीं। ध्यान का निर्देश दिया तो धीरे-धीरे दुख होता जा रहा है। उन्होंने पहाड़पुर में अपने पति और दो बेटों की समाधि बनवाई है। साथ में एक बड़ा विद्यालय बनाया गया है जहाँ मुफ़्त शिक्षा की व्यवस्था है। इस प्रकार उनका जीवन किसी तपस्वी के जीवन से कम नहीं है और ऐसी महान विभूति के राष्ट्रपति भवन में होना भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार का उद्देश्य है।

  • लेखक के बारे में

    वर्तमान में नईदुनिया डॉट कॉम में शेयरधारक हैं। पत्रकारिता में अलग-अलग नामांकन में 21 साल का दीर्घ अनुभव। वर्ष 2002 से प्रिंट और डिजिटल में कई बड़े दिन सिद्धांत


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