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कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर भारी पड़ा शिव-राज का आत्मविश्वास – Madhya pradesh politics bjp congress motion of no confidence shivraj singh chouhan kamal nath

कांग्रेस को भी यह भलीभांति मिली थी कि प्रदेश की लोकप्रिय सरकार के खिलाफ जो अविश्वास प्रस्ताव वह सदनों में पेश करने जा रही है।

द्वारा कुशाग्र वलुस्कर

प्रकाशित तिथि: सोम, 26 दिसंबर 2022 10:33 अपराह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: सोम, 26 दिसंबर 2022 10:33 अपराह्न (IST)

कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर भारी भरकम शिव-राज का सामान रखा गया
कांग्रेस को भी यह भलीभांति मिली थी कि प्रदेश की लोकप्रिय सरकार के खिलाफ जो अविश्वास प्रस्ताव वह सदनों में पेश करने जा रही है।

कृष्णमोहन झा

मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के खिलाफ़ तानाशाही सरकार के प्रस्ताव का जो हश्र हुआ उस पर कोई आश्चर्य व्यक्त नहीं किया जा सका। कांग्रेस को भी यह भलीभांति मिली थी कि प्रदेश की लोकप्रिय सरकार के खिलाफ जो अविश्वास प्रस्ताव वह सदनों में पेश करने जा रही है उसे सदनों में भारी बहुमत से खारिज कर दिया जाएगा। मजे की बात तो यह है कि मतदान की नौबत ही नहीं आई और उसे ध्वनिमत मत से खारिज कर दिया गया। कांग्रेस की रैली से अधिक कुछ नहीं था, क्योंकि सदन में सरकार को समर्थन देने की वकालत से पेश किया गया था, यह प्रस्ताव किसी भी तरह से किसी भी मुद्दे पर युवराज सरकार को मुक्ति की शपथ दिलाने के लिए जारी रखा गया है। अविश्वास प्रस्ताव में बहस के दौरान महाराजगंज सरकार के विधायकों ने कांग्रेस के समर्थकों का प्रभावशाली अंदाज में जो समर्थक जवाब दिया। दो राय यह नहीं हो सकती कि यह अविश्वास प्रस्ताव राष्ट्रपति कांग्रेस पार्टी के लिए गठबंधन का प्रस्ताव साबित हुआ जिसमें सदनों ने भी कांग्रेस पार्टी के गठबंधन में शामिल होकर गठबंधन किया और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक बार फिर से विजेता घोषित किया। उभरने का अवसर प्रदान किया गया। ऐसी कौन है सी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर ली जिस पर वह गर्व महसूस करने का अधिकारी बन गया है। अविश्वास प्रस्ताव पर दो दिनों तक चली चर्चा के दौरान पूरे समय कांग्रेस के प्रदेश एवं अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में कांग्रेस के भीतर इतनी गहरी स्थिति बनी रही कि सदन में पूर्व मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति का ठोस कारण भी स्पष्ट हो गया। अनुभव कर रही थी।

कमल नाथ की गैरमौजूदगी को लेकर सत्य पक्ष के सदस्यों ने कांग्रेस पर जो आंकड़ा कटाक्षे रखा, उनका कोई भी जवाब अर्थशास्त्री दल के पास नहीं था। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक प्रस्ताव है कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री अशोक प्रदेश की सर्वाधिक लोकप्रिय शिवराज सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव करने के पक्ष में नहीं थे। बहस के दौरान पूरे समय में पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने स्वा साल के कार्यकाल में ऐसी कोई उपलब्धि हासिल नहीं की थी, जिसमें वे सदन में वर्तमान सरकार के लिए प्रेरक उदाहरण के रूप में पेश कर सकते थे। या फिर पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में अपने विरोधियों के लिए सत्ता पक्ष की आलोचना को सहन करने का साहस उनके अंदर नहीं था। कांग्रेस द्वारा सदन में अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जाने के कारण सदन में चर्चा के दौरान सदन में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया। राज्य विधानसभा में कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव का जो हश्र हुआ है, उसे देखकर यह भी समझ में आता है कि आखिर कौन सा राजनीतिक लाभ लेने की नीति है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का फैसला। ऐसा होता है कि पार्टी ने कोई प्रस्ताव नहीं रखा था, लेकिन सदन में ही यह प्रस्ताव पूर्वाचल होमवर्क में रखा गया था। कोई भी आरोप सिद्ध करने में रही।

विधानसभा में कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव 15 घंटे का समय रखा गया था। सत्य पक्ष और सिद्धांत, दोनों को इस प्रस्ताव पर बोलने का समय बराबर दिया गया। चर्चा के दौरान बीच-बीच में अधिकारियों की स्थिति भी सामान्य रही। कांग्रेस ने शिवराज सरकार को घेरने का प्रयास तो पूरा किया लेकिन सत्य पक्ष की ओर से मठाधीश दा नरोत्तम मिश्रा ने जिस आक्रामक अंदाज में मोर्चा संभाला, उसका कारण एक तरह का नामांकन ही बचाव की मुद्रा में आ गया। विवाद के दौरान बार-बार ऐसा हो रहा है कि सदन में बिना किसी तैयारी के इस अविश्वास प्रस्ताव पर मुहर लगाने के लिए शिवराज सरकार ने भी कोई तैयारी नहीं की है। बहस के बीच एक बार भी ऐसा कुछ नहीं हुआ कि रिपब्लिक कांग्रेस पार्टी ने सरकार को नाजुक स्थिति में पहुंचा दिया हो। आत्म विश्वास से लेबरेज महाराजगंज सरकार के अभियुक्त नरोत्तम मिश्र के पास तो कांग्रेस के हर आरोप की काट मौजूद है। राक्षस ने अपने हर तर्क की पुष्टि के लिए बा कायदा ठोस सबूत प्रस्तुत किया, जो कि विपक्षी कांग्रेस पार्टी को बगलें देने पर मजबूर कर दिया। जब पार्टिसिपेंट्स के ऑफर की धज्जियां उड़ा रहे थे तो ऐसा अनोखा हो रहा था कि उनके कॉन्ग्रेस के विश्वास पर भारी असर पड़ रहा है।

विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने यूं तो अपने 104 विश्वास प्रस्तावों में 51 अंकों पर सरकार को समर्थन देने की योजना बनाई थी, लेकिन अगर उसे अपने मंसूबों में सफलता नहीं मिली तो यह सबसे बड़ा कारण है कि कांग्रेस पार्टी ने इसे लागू कर दिया है। पहले से कोई प्रभावशाली रणनीति तैयार नहीं की थी। अविश्वास प्रस्ताव में बहस के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ने एक ओर जहां पार्टी के जोश और उत्साह को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई, वहीं दूसरी ओर इस मुद्दे पर आशुतोष दल भाजपा ने उन्हें आड़े हाथ ले लिया। का मौका भी उपलब्ध करा दिया। अविश्वासी नरोत्तम मिश्र ने चुटकी लेते हुए कहा कि सदन में कहा गया है कि मैं सदन में भाजपा के खिलाफ बहस क्यों कर रहा हूं, लेकिन कांग्रेस पार्टी के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेने के लिए सदन में भी उनकी उपस्थिति न होने से ऐसा अनोखा होता है कि उन्होंने अपनी पार्टी द्वारा यह अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव में तथ्यहीन और आधार हीन शोधकर्ता ने कहा कि इस तरह का प्रस्ताव सदन में पहली बार आया है।

प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति मजबूती के कांग्रेस के समर्थकों का दृढ़ विश्वास खंडन किया गया राक्षस ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के इलाक़े में मालवा में सिमी के शिखर और चंबल से लेकर विंध्य तक डाकुओं की जड़ें बढ़ती रहीं, वल्लभ भवन में स्टॉक्स ने डाटाबेस जमा कर लिया था और बड़ी संख्या में एस्टर को ठिकाने लगाया जा रहा था। किसानों का कर्ज़ माफ़ी दिखाया जा रहा था। कांग्रेस सरकार के पतन के बाद भाजपा सरकार ने प्रदेश में हर क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए साडी व्यवस्था को चाकचौबंद कर दिया। कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह कट्टरपंथियों के हितैषी होने का दावा करता है लेकिन कांग्रेस में कट्टरपंथियों ने कट्टरपंथियों से लेकर नवाजने में कभी भी कट्टरपंथियों को शामिल नहीं किया।

अविश्वास प्रस्ताव पर दो दिन तक चली बहस का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस प्रस्ताव को लाचार और झूठ का पुलिंदा खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र में वफादार नहीं है। भाजपा ने कांग्रेस की सरकार नहीं गिराई बल्कि उसके पतन के लिए उसका अपमान ही जिम्मेदार है। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर कांग्रेस सरकार ने जनता के गठबंधन में जगह बनाई तो प्रदेश में उन्हें सत्ता से बेदखल नहीं होना पड़ेगा। मुख्यमंत्री चौहान ने पिछली कांग्रेस सरकार पर पार्टी का लोक समर्थन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उस समय बीजेपी के नेताओं और समर्थकों ने अपनी पसंद का चुनाव किया था, लेकिन बीजेपी का गठन ही हुआ था, हमने स्पष्ट कर दिया था कि यह सरकार कभी अपनी राजनीतिक विचारधारा के खिलाफ रही है। विद्वेषपूर्ण कार्यवाही नहीं।

शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के साथ कर्जमाफी के मामले में पिछली कांग्रेस सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछली सरकार ने किसानों के साथ मिलकर कर्जमाफी का आरोप लगाया है। भाजपा सरकार ने ही हम किसानों को तत्परता के साथ कदम से राहत के लिए नियुक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने अपनी विपक्षी पार्टी पर जनता के बीच सहमति के उद्देश्य से शुरू किये गये प्रतिबंधों को बंद करने का भी आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री जब अविश्वास प्रस्ताव पर हुई बहस का उत्तर दे रहे थे तब सदन में नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नेपोलियन की गैर मौजूदगी पर चर्चा का विषय बनी रही। कांग्रेस के इस अविश्वास प्रस्ताव का जो हश्र पहले से तय था, वही हुआ लेकिन कांग्रेस के प्रदेश संगठन में व्यापक समुदायों को शामिल कर दिया गया। कांग्रेस के पास के राज्य विधानसभा में जो बल संख्या है वह इतनी कम नहीं है कि उसके द्वारा इस नियुक्ति का शिकार बनने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जाए। असल में कांग्रेस को भी अब अंदर ही अंदर ऐसा महसूस हो रहा है कि वह प्रदेश की लोकप्रिय सरकार को फंसाने के लिए जो जाल में फंस गई थी, वह खुद ही फंसकर रह गई। सच तो यह है कि बिना किसी तैयारी के उन्होंने जो अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, उसमें उन्होंने अपना प्रबल राजनीतिक लाभ उठाते हुए शिवराज सरकार में कोई भूल नहीं की, इसलिए आज वह विजेताओं की मुद्रा में दिखाई दे रही हैं। कांग्रेस के पास तो हाथ मालने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

  • लेखक के बारे में

    माखनलाल शेट्टी राष्ट्रीय मठ एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से मास कम्युनिकेशन ग्रेजुएट कुशाग्र वालुस्कर नईदुनिया डिजिटल में सीनियर सब एसोसिएट के पद पर हैं। माह


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