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Bihar Election Result 2020: मोदी फैक्टर बना चुनाव जीत का ‘ब्रह्मास्त्र’

किष्किंधा के महाबली राजा बालि के बारे में आपने जरूर सुना होगा। उन्हें इंद्र का वरदान मिला था कि रणभूमि में जो भी उनके सामने होगा उसकी आधी ताकत राजा बालि को मिल जाएगी।

Story Highlights
  • बिहार में मोदी फेक्टर कैसे गए? बिहार में मोदी ने 12 रैलियां की और इनमें ज्यादातर विधानसभा सीटों पर एनडीए के उम्मीदवार ने जीत हासिल की।
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किष्किंधा के महाबली राजा बालि के बारे में आपने जरूर सुना होगा। उन्हें इंद्र का वरदान मिला था कि रणभूमि में जो भी उनके सामने होगा उसकी आधी ताकत राजा बालि को मिल जाएगी। पीएम मोदी को भी भारत की जनता ने कुछ ऐसा ही वरदान दे रखा है। बिहार चुनाव के नतीजों से यह बात फिर साबित हुई है, क्योंकि सभी एक्जिट पोल और अनुमान के उलट राज्य के लोगों ने एनडीए सरकार पर फिर मुहर लगा दी थी। ऐसा क्या होता है कि हर बार मुश्किल लगने वाला मुकाबला मोदी के मैदान में उतरने के बाद बीजेपी और उसके सहयोगियों को जीत का गिफ्ट दे जाता है!

बिहार में मोदी फेक्टर कैसे गए?
बिहार में मोदी ने 12 रैलियां की और इनमें ज्यादातर विधानसभा सीटों पर एनडीए के उम्मीदवार ने जीत हासिल की। बीजेपी का जीत का स्ट्राइक रेट भी लगभग 70 परसेंट रहा। चुनाव दर चुनाव साबित हो गया है कि मोदी, एनडीए को मुश्किल स्थिति से निकाल लेते हैं।

नीतीश की कमियों को ढक दिया

मोदी अपने काम और अपने लोगों तक पहुंचकर अपने सहयोगियों की कमियों को भी ढक देते हैं। बिहार इसका सबसे ताजा उदाहरण है। जब प्रचार शुरू हुआ तो तीन बार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार साफ तौर पर पीछे दिख रहे थे। सीट आरक्षण ना होने की वजह से चिराग पासवान की एलजेपी भी एनडीए से अलग हो चुकी थी। तेजस्वी यादव के सामने बेरोजगारी मुद्दे पर नीतीश कुमार की तरह तरह घिर गए और ऐसा लगने लगा कि बाजी इस बार उलट हो सकती है, लेकिन जब मोदी ने प्रचार शुरू किया तो एनडीए फिर से की स्थिति में आ गया। मोदी दरअसल लोगों की नब्ज जानते हैं इसलिए रैलियों में अपनी बात और अपनी सरकार के कामकाज लोगों को समझा पाते हैं।

मोदी पर लोगों को भरोसा
कोरोना संकट में देश में लाखों करोड़ों लोगों के सामने रोजी-रोजी की दिक्कत हो गई, लेकिन 7-8 महीने से चल रही इस संकट के दौरान मोदी सरकार ने देश के करीब 80 करोड़ गरीबों तक मुफ्त राशन पहुंचाया। इसमें लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। छठ पूजा तक हर किसी को हर महीने 5 किलो गेहूं, 5 किलो चावल और एक किलो दाल देने से बिहार की बड़ी आबादी को फायदा हुआ। इसी तरह देश की 20 करोड़ महिलाओं को 500 रुपये महीने और गरीबों तक गैस कनेक्शन पहुंचाने से महिलाएं मोदी की कोर वोटर्स बन गई हैं।

मोदी चुनाव में ये संदेश देने में कामयाब रहे कि वह सिर्फ सपने दिखाते हैं बल्कि उसे हकीकत में बदलने में जोर लगा देते हैं। यही कारण है कि लोग उनके वादों पर यकीन करते हैं।

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बेहतरीन कम्युनिकेटर
दुनिया के सबसे बड़े इन्वेस्टर वैरेन बफेट के मुताबिक, सफलता के लिए सबसे जरूरी गुण है, सामंजस्य। पीएम मोदी की भी यही सबसे बड़ी खूबी है उनका पब्लिक कनेक्ट। जिसकी वजह से वो बिहार से मध्य प्रदेश और कर्नाटक से उत्तर प्रदेश तक बखूबी अपना संदेश पहुंचा देते हैं।

मोदी का अंदाज
आलोचना को भी मोदी अपने पक्ष में इस्तेमाल करते जानते हैं। याद करेंगे गुजरात जो मोदी के लिए सबसे मुश्किल चुनाव कहा जा रहा था, लेकिन उन्होंने उस आलोचना को अपने पक्ष में बदल लिया। अक्सर विपक्षी यहीं गच्चा खा जाते हैं। इसी तरह मोदी ने जब कहा, ‘मुझे गंगा मैया ने बुलाया है तो पूरे यूपी ने उन्हें लोकसभा और विधानसभा दोनों में छप्पर फाड़ बहुमत दिया है। जैसा देश वैसी बोली का मोदी का अंदाज उन्हें जनता से जोड़ देता है। जैसे बिहार की रैलियों में मोदी ने भोजपुरी से भाषण शुरू किया।

सोशल मीडिया में सक्रिय होने की वजह से युवाओं को जोड़ने में उन्हें काफी मदद मिली है। उन्हें मालूम था कि सोशल मीडिया में बिहार में का बा .. खूब ट्रेंड कर रहा है इसलिए एक रैली में उन्होंने जवाब दिया। बिहार भारत का दिल बा, बिहार भारत का स्वाभिमान बा, भारत को संपूर्ण क्रांति का नारा देने वाला बिहार है। बिहार आत्मनिर्भर बाबा

राजनीतिक नारे
पीएम मोदी नए नारों के जरिए अपनी बात पहुंचाते हैं। जैसे राज्य और केंद्र दोनों जगह एक ही पार्टी की सरकार हो ये बताने के लिए उन्होंने बोलचाल में इस्तेमाल होने वाले डबल इंजन की सरकार का मुहावरा बोला जिसे जनता तक बात पहुंच गई कि वह केंद्र की तरह राज्य में भी एनडीए की सरकार के लिए समर्थन मांग कर रहे हैं। इसी तरह तेजस्वी यादव और राहुल गांधी को उन्होंने डबल युवराज कहकर सारी बात स्पष्ट कर दी। बीजेपी के साथ साथ एनडीए को भी मोदी की लोकप्रियता का फायदा बिहार विधानसभा ही नहीं, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात और मणिपुर में हुए उपचुनाव में भी जमकर मिला है।

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मोदी ने कई ट्रेंड भी बदले हैं जैसे राजनीतिक पार्टियां आमतौर पर विकास के मुद्दे पर चुनाव नहीं लड़ती हैं, लेकिन पीएम ने विकास को प्रचार का मुख्य मुद्दा बनाकर राजनीतिककरण बदलने में सफलता हासिल की है।

मोदी अपना संदेश पहुंचाने के लिए नए जाने के स्मार्ट फोन और सोशल मीडिया का बखूबी इस्तेमाल करना जानते हैं जिससे वे अपनी बात युवाओं तक पहुंचाने में सफल रहे हैं, लेकिन वे परंपरागत माध्यम जैसे रेडियो और खत के जरिए भी अपनी बात कहने का हश्र जानते हैं। । बिहार में चुनाव प्रचार के आखिरी दिन उन्होंने राज्य के लोगों तक पहुंचने के लिए जो सार्वजनिक चिट्ठी लिखी उसकी बातों को चर्चा में बने रहे।
इन सभी बातों का असर है कि लोगों पर मोदी का जादू बरकरार है और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के लिए इसका तोड़ निकालना बड़ी चुनौती होगी।

ब्लगर के बारे में

अमित देवगन

 

अमित देवगन

पत्रकारिता के क्षेत्र में 16 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले अमिश देवगन एक्जीक्यूटिव एडिटर हैं और हिंदुस्तान टाइम्स और जी मीडिया जैसे जाने-माने न्यूज समूहों में काम कर रहे हैं। मई 2014 से नवंबर 2015 तक वे जी बिजनेस सेंटर के शेफ एडिटर रहे। इससे पहले जी बिजनेस में बतौर डिप्टी एडिटर, एडिटर आइटम और एडिटर स्पेशल प्रोजेक्ट्स के तौर पर काम किया। जी बिजनेस में बने रहे बिजनेस सेंटर के नंबर -1 डिबेट शो ‘बिग स्टोरी बिग डिबेट’ को नए मुकाम तक पहुंचेंगे। इसके अलावा ‘बिग एनकाउंटर’ नाम के इंटरव्यू शो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली, रेल मंत्री सुरेश प्रभु, शहरी विकास मंत्री नितिन गडकरी सहित कई शीर्ष हस्तियों का इंटरव्यू किया। वे देवेंद्र फड़णवीस, मनोहर लाल खट्टर, शिवराज सिंह चौहान और रमन सिंह जैसे मुख्य कार्यकर्ताओं और जयराम रमेश, आनंद शर्मा, कमलनाथ जैसे कांग्रेसी दिग्गजों का इंटरव्यू भी कर चुके हैं। निडर पत्रकारिता: अमिश को उनकी निडर पत्रकारिता और बेबाक अंदाज के लिए जाना जाता है। अब तक के करियर में वे तेल स्कला, ओडिशा का खनन स्कला और हवाला व्यवसाय मोईन कुरैशी से जुड़े कई बड़े खुलेसे कर चुके हैं। अवॉर्ड और उपलब्धियां: पावर ब्रांड 2016 ट्रेंड सेटर अवॉर्ड, ईएनबीए का 2015 में बस्ट बिजनेस सेंटर अवॉर्ड, आईएमएफ यंग इमर्जिंग एडिटर्स अवॉर्ड 2015 और बिजनेस जर्नलिज्म के लिए सृष्टि अवॉर्ड।

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“खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते”।

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