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पिता जेल में और मां ने छोड़ दिया, कुत्ते के साथ फुटपाथ पर सोता है दस साल का अंकित|

Father in jail and mother leaves ten year old Ankit sleeps on pavement with a dog

करीब दस साल के अंकित को याद नहीं कि वह कहां का रहने वाला है। उसे केवल इतना पता है कि पिता जेल में हैं और मां ने उसे छोड़ दिया है। कभी गुब्बारे बेचकर तो कभी चाय की दुकान पर काम करके अपने एकमात्र दोस्त डैनी के साथ फुटपाथ पर सोता है। डैनी कोई और नहीं सड़कों पर घूमने वाला एक कुत्ता है। डैनी अंकित के साथ सोता ही नहीं है, हमेशा उसके साथ रहता भी है। पिछले काफी समय से अंकित का जीवन डैनी के साथ ही कट रहा है। अंकित जो भी कमाता है, उससे खुद और डैनी का पेट भरता है। 

करीब एक पखवाड़े पहले भीषण ठंड में एक बंद दुकान के बाहर फुटपाथ पर पतला कंबल ओढ़े दोनों की सोते हुए तस्वीर किसी ने क्लिक की और यह वायरल हो गई। इसके बाद सीएम योगी ने भी संज्ञान लिया। उनके निर्देश पर मुजफ्फरनगर प्रशासन बच्चे का पता लगाने की कोशिशों में जुट गया।  मुजफ्फरनगर के एसएसपी अभिषेक यादव की कोशिशों से पुलिस वालों ने अंकित को खोज निकला। अब वह पुलिस की देखरेख में है।

अंकित जिस दुकान पर कई बार काम कर चुका है उसके मालिक के अनुसार जब तक वह काम करता है उसका कुत्ता एक कोने में बैठा रहता है। दुकानदार के अनुसार अंकित स्वाभिमानी है। वह मुफ्त में कुछ नहीं लेता है। अपने कुत्ते के लिए दूध भी मुफ्त में नहीं लेता है। 

मुजफ्फरनगर के एसएसपी अभिषेक यादव ने कहा कि अब अंकित मुजफ्फरनगर पुलिस की देखरेख में है। हम उसके परिवार वालों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं और उसकी तस्वीरें आसपास के जिलों के विभिन्न पुलिस थानों में भेजी गई हैं। हमने जिला महिला और बाल कल्याण विभाग को भी सूचित किया है।

शहर कोतवाली के एसएचओ अनिल कापरवान के अनुसार फिलहाल अंकित शीला देवी नामक एक महिला के साथ रह रहा है। अंकित महिला से पहले से परिचित है और उसे बाई कहता है। जब तक अंकित के परिवार वालों  के बारे में ठीक-ठीक पता नहीं चल जाता वह यहीं रहेगा। उसका एक निजी स्कूल में नाम लिखवा दिया गया है। स्थानीय पुलिस के अनुरोध पर स्कूल प्रबंधन उसे मुफ्त शिक्षा देने पर भी सहमत हो गया है।



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पिता जेल में और मां ने छोड़ दिया, कुत्ते के साथ फुटपाथ पर सोता है दस साल का अंकित| via @varanasicoveragenews.com

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“खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते”।

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