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यूपी: पूर्वांचल के पूर्व बाहुबली सांसद और रिटायर्ड डिप्टी एसपी के बेटे की वर्चस्व की लड़ाई, बनारस में मारा गया था हिस्ट्रीशीटर नीतेश.

वाराणसी के शिवपुर स्थित सदर तहसील परिसर में सारनाथ थाने के हिस्ट्रीशीटर नीतेश सिंह उर्फ बबलू की हत्या के पीछे की अहम वजह पूर्वांचल के एक बाहुबली सांसद और लखनऊ में रहने वाले एक रिटायर्ड डीएसपी के बेटे की वर्चस्व की लड़ाई थी।

यह बात एक लाख के इनामी बदमाश कन्हैया विश्वकर्मा उर्फ गिरधारी उर्फ डॉक्टर के दिल्ली में गिरफ्तार होने के बाद सामने आई है। पुलिस अफसरों के अनुसार गिरधारी से पूछताछ में वर्ष 2016 से 2021 के बीच लखनऊ से बनारस तक मारे गए जरायम जगत के चार अहम लोगों की हत्या में शामिल शूटर और साजिशकर्ता भी बेनकाब होंगे।

जरायम जगत में पूर्वांचल के कुख्यात नामों की रियल इस्टेट और ठेकेदारी के काम में सत्तर के दशक से ही तगड़ी दखल रही है।

इसके साथ ही इन सभी की चाहत यह भी रहती है कि लखनऊ तक उनके नाम की धमक भी हो। मुन्ना बजरंगी और पूर्वांचल के एक पूर्व बाहुबली सांसद की अदावत के पीछे भी यही एक अहम वजह रही।


इस अदावत में मुन्ना बजरंगी गिरोह पर करारा प्रहार तब हुआ जब लखनऊ के विकासनगर में पांच मार्च 2016 को उसके साले पुष्पजीत उर्फ पीजे की हत्या कर दी गई।

पीजे की हत्या से बजरंगी उबर भी नहीं पाया था कि एक दिसंबर 2017 को लखनऊ के ग्वारी ओवरब्रिज पर उसके दाएं हाथ कहलाने वाले और वसूली मैनेजर वाराणसी के विश्वेश्वरगंज निवासी मोहम्मद तारिक की हत्या कर दी गई।

नीतेश सिंह उर्फ बबलू हत्याकांड – फोटो : वाराणसी कवरेज

इन दोनों हत्याकांड का सही खुलासा आज भी लखनऊ की पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। जबकि, पुलिस सूत्र बताते हैं कि पीजे और तारिक की हत्या में भी 22 से ज्यादा आपराधिक मामलों के आरोपी गिरधारी की अहम भूमिका थी।

इसके बाद नौ जुलाई 2018 को बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई। पीजे की हत्या के बाद ही बजरंगी और कभी उसके घरेलू सदस्य रहे लखनऊ में रहने वाले रिटायर्ड डिप्टी एसपी के बेटे के संबंधों में खटास आ गई थी, जो दिनोंदिन बढ़ती ही चली गई।

बजरंगी की हत्या के बाद जरायम जगत में उसकी जगह लेने के साथ ही लखनऊ के रियल इस्टेट कारोबार और पीडब्ल्यूडी के ठेकों में एकाधिकार के लिए पूर्व बाहुबली सांसद और रिटायर्ड डिप्टी एसपी के बेटे के बीच वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई।

वाराणसी कवरेज
Ajit Murder Case: Girdhari Will Reveal The Secrets Of Murders Of …

रिटायर्ड डिप्टी एसपी के बेटे की सरपरस्ती में रहने के कारण 30 सितंबर 2019 को शिवपुर सदर तहसील में बस, जमीन और अन्य धंधों से जुड़े नीतेश सिंह उर्फ बबलू की हत्या कर दी गई।

इस हत्या से पूर्वांचल से लखनऊ तक यह संदेश देने का प्रयास भी किया गया कि जरायम जगत में अब बजरंगी की जगह पूर्व बाहुबली सांसद ने ले ली है।

लगभग 15 महीना शांत रहने के बाद अजीत की हत्या से पूर्व बाबहुली सांसद की शरण में रहने वाले गिरधारी को लेकर लखनऊ से लेकर बनारस, दिल्ली और मुंबई तक खलबली मच गई।

गिरधारी को गिरफ्तार करने से लेकर उसे दिल्ली से लखनऊ लाने की कवायद में जुटे पुलिस सूत्रों ने बताया कि शातिर बदमाश से कुछ भी उगलवाना आसान नहीं है।

फिर भी प्रयास यही होगा कि गिरधारी चारों हत्या के बारे में सही, सटीक और सार्थक जानकारी दे। ताकि, उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी प्रभावी कार्रवाई हो सके।

आजमगढ़ के तरवां क्षेत्र में रची गई थी अजीत की हत्या की साजिश


अजीत सिंह की हत्या की साजिश आजमगढ़ जिले के तरवां क्षेत्र के एक सफेदपोश के घर रची गई थी। हत्या की वजह पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू की हत्या में अजीत की गवाही न होने देने के साथ ही मुहम्मदाबाद गोहना के ब्लाक प्रमुख चुनाव में गिरधारी के आगे कोई सशक्त प्रत्याशी नहीं उतरने देना था।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, आजमगढ़ जेल में बंद ध्रुव सिंह उर्फ कुंटू वारदात का सूत्रधार था और उसने गिरधारी को विश्वास में लिया था।

फिर इसकी जानकारी जेल में ही बंद अखंड प्रताप सिंह और पूर्व बाहुबली सांसद व सुल्तानपुर निवासी उसके दो गुर्गों को भी दी गई।

तरवां क्षेत्र निवासी सफेदपोश ने ही कुंटू के कहने पर गिरधारी के लखनऊ जाने के साथ ही उसके रहने-ठहरने और आवागमन की व्यवस्था भी कराई थी।

इस बीच गिरधारी, उसके साथी शूटरों की बातचीत वारदात की साजिश में शामिल सभी लोगों से व्हट्सऐप कॉल और चैट के माध्यम से लगातार होती रही।

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महिला मित्र के फ्लैट में रुकता, पूर्व बाहुबली सांसद के करीबी से पूछताछ

गिरधारी की मऊ की रहने वाली एक महिला मित्र का फ्लैट दिल्ली में है। गिरधारी पहले भी पुलिस को चकमा देने के लिए मुंबई जाता था और फिर दिल्ली लौट कर महिला मित्र के फ्लैट में छुप कर रहता था।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तारी से पहले गिरधारी अपने महिला मित्र के ही फ्लैट में जाने की तैयारी में था। इस बीच उसे लखनऊ पुलिस और एसटीएफ की एक-एक गतिविधि की सूचना व्हाट्सएप पर मिल रही थी।

हालांकि किसी तरह से वह पकड़ा गया और उसके गिरफ्तार होने के बाद उसे संरक्षण और शरण देने वालों की हलक के नीचे पानी भी नहीं उतर रहा है।

सभी को आशंका है कि पुलिस की कड़ाई से पूछताछ में कहीं गिरधारी टूट न जाए और सबका नाम न ले ले। उधर, लखनऊ पुलिस ने अजीत की हत्या में शामिल एक शूटर की उपचार कराने संबंधी साक्ष्य मिलने पर पूर्व बाहुबली सांसद के कुछ करीबियों को हिरासत में लेकर मंगलवार से नए सिरे से पूछताछ शुरू की है।

पूर्व बाहुबली सांसद के लिए आगामी दिन होंगे बेहद मुश्किल भरे।

मुन्ना बजरंगी हत्याकांड की जांच अब सीबीआई कर रही है। बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने हाईकोर्ट में सीबीआई जांच के लिए जो याचिका दाखिल की थी, उसमें अपने भाई पीजे और तारिक की हत्या को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की साजिश का हिस्सा बताया था। ऐसे में पुलिस अफसरों का कहना है कि अजीत, बजरंगी, तारिक और पीजे की हत्या में सवालों के घेरे में रहने वाले पूर्व बाहुबली सांसद के लिए आगामी दिन गिरधारी के गिरफ्त में आने के बाद मुश्किल भरे होंगे।

इसके साथ ही पूर्व बाहुबली सांसद और रिटायर्ड डिप्टी एसपी के बेटे से जुड़े सभी लोग पुलिस के रडार पर भी हैं।

गिरधारी की गिरफ्तारी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं, कई सवाल।

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इनामी बदमाश गिरधारी की गिरफ्तारी को लेकर बनारस से लखनऊ तक तरह-तरह की चर्चाएं हैं।

जरायम जगत और पुलिस की कार्यशैली पर बारीकी से नजर रखने वालों का कहना है कि ऐसा अक्सर क्यों होता है कि जो पूर्वांचल से लेकर लखनऊ तक कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन जाते हैं,

वह आसानी से दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ जाते हैं। पूर्व में बजरंगी और एक मौजूदा एमएलसी की गिरफ्तारी जैसे ऐसे कई उदाहरण सामने हैं।

वहीं कुछ जानकारों का यह भी कहना था कि कहीं खुद पर शिकंजा कसता देख कर पूर्व बाहुबली सांसद ने अपने गुर्गे गिरधारी को जानबूझकर तो नहीं दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा दिया।


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“खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते”।

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