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New Year 2021 Calibration Guideline: नए साल के जश्न को लेकर बन रही गाइडलाइन, इन शहरों में लग सकती है पाबंदी

सख्त निर्णय नए वर्ष के लिए लेने का फैसला किया है।

New Year 2021 Calibration Guideline: नया साल चंद दिन दूर है। हर कोई बढ़चढ़ कर जश्न मनाना चाहता है, लेकिन कोरोना महामारी के कारण हो सकता है कि कई शहरों और राज्यों में ऐसा संभव न हो।

दरअसल, जहां जहां नाइट कर्फ्यू लगा है, वहां रात में सार्वजनिक तौर पर जश्म मनाने की अनुमति नहीं मिल सकती है। राज्य सरकारें इस बारे में गाइडलाइन बनाने में जुटी हैं। जल्द ही नियम सामने आ जाएंगे।

ताजा खबर राजस्थान से है। यहां कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री अशोक गलहोत ने संकेत दिए हैं कि प्रदेशवासियों को नए साल का जश्न मनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

खबर है कि यहां सरकार होटलों व सार्वजनिक स्थालों पर नए साल का जश्न मनाने पर रोक लगाने को लेकर गाइडलाइन तैयार कर रही है। आतिशबाजी पर भी रोक रहेगी। इस बारे में गृह विभाग अगले एक-दो दिन में अधिकारिक रूप से जिला कलेक्टरों व पुलिस अधीक्षकों को परिपत्र जारी करेगी।


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इससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोरोना महामारी को लेकर एक बड़ी बैठक ली और हालात का जायजा लिया। बैठक के बाद अशोक गहलोत ने ट्वीट किया कि कोरोना महामारी के समय में स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए दीपावली पर सरकार ने जो कदम उठाए थे, उसी प्रकार का सख्त निर्णय नए वर्ष के लिए लेने का फैसला किया है। प्रदेशवासी नए वर्ष का जश्न अपने घर में परिवार के साथ मनाएं, भीड़भाड़ से बचें और आतिशबाजी नहीं करें। यह स्वयं के एवं दूसरों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।

देश के इन शहरों में लगा है नाइट कर्फ्यू

  • पंजाब के सभी शहरों में नाइट कर्फ्यू है
  • राजस्थान में 8 जिलो मुख्यालयों में नाइट कर्फ्यू है। इनमें जयपुर, जोधपुर, अजमेर, बीकानेर, कोटा, अलवर, उदयपुर, भीलवाड़ा शामिल हैं।
  • महाराष्‍ट्र में 22 दिसंबर से 5 जनवरी तक रात के कर्फ्यू की घोषणा।
  • गुजरात के बड़े शहरों में नाइट कर्फ्यू है
  • मध्य प्रदेश में इंदौर, भोपाल समेत अन्य शहरों में रात की आवाजाही बंद है।

New Year 2021 Calibration Guideline: नए साल के जश्न को लेकर बन रही गाइडलाइन, इन शहरों में लग सकती है पाबंदी via @varanasicoveragenews.com

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“खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते”।

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